वास्तु शास्त्र में शनि घर की पश्चिम दिशा को प्रभावित करते हैं। इस दिशा में किचन, मंदिर, बेडरूम, टूटा सामान, बालकनी और बाथरूम बनाने से जीवन में आर्थिक, स्वास्थ्य और पारिवारिक परेशानियां आ सकती हैं। समाधान के लिए दीवार पर जल तत्व की तस्वीरें लगाएं, वरुण यंत्र स्थापित करें, भारी फर्नीचर रखें और इस दिशा को साफ-सुथरा रखें।
Vastu tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह घर की पश्चिम दिशा को प्रभावित करते हैं और इस दिशा में गलतियों से आर्थिक, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस दिशा में किचन, मंदिर, बेडरूम, टूटा सामान, बालकनी और बाथरूम नहीं बनाना चाहिए। सुधार के लिए दीवार पर झरने या नदियों जैसी जल तत्व की तस्वीरें लगाएं, वरुण यंत्र स्थापित करें, भारी फर्नीचर रखें और पश्चिम दिशा को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें।
सही दिशा से घर में बनी रहती है सकारात्मक ऊर्जा
शनि ग्रह घर के पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। यह दिशा घर में स्थिरता, अनुशासन और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। यदि इस दिशा का उपयोग सही तरीके से किया जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वहीं, गलत वस्तुएं या कमरों का निर्माण करने से शनि क्रोधित हो सकते हैं और जीवन में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
पश्चिम दिशा में न करें ये पांच गलतियां
- किचन का निर्माण न करें
शनि की दिशा में किचन बनाना अनुचित माना गया है। पश्चिम दिशा में किचन होने से घर में आर्थिक परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, परिवार के लोगों की सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। अन्न की कमी या भोजन से जुड़ी समस्याएं इस दिशा में किचन होने पर बढ़ सकती हैं।
- मंदिर का निर्माण न करें
घर का मंदिर पश्चिम दिशा में बनाना शुभ नहीं माना जाता। इस दिशा में मंदिर होने से घर के बड़े सदस्य के करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। शनि की दिशा में मंदिर बनाने से मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद बढ़ सकते हैं।
- बेडरूम न बनाएं
पश्चिम दिशा में बेडरूम या सोने का कमरा बनाना भी अनुचित है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। खासकर पति-पत्नी के बीच अलगाव की स्थिति भी बन सकती है। इस दिशा में सोने वाले कमरे से शनि का दोष सक्रिय हो सकता है।
- टूटा हुआ सामान न रखें
पश्चिम दिशा में टूटा-फूटा सामान रखना भी शुभ नहीं है। शनि इस दिशा में नकारात्मक वस्तुओं को देखकर क्रोधित हो जाते हैं। इसके कारण जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं और बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं।
- बालकनी और बाथरूम न बनाएं
पश्चिम दिशा में बालकनी या बाथरूम का निर्माण भी शुभ नहीं माना जाता। बालकनी इस दिशा में होने से परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े और तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। वहीं, बाथरूम बनने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घर में बना रहता है।
पश्चिम दिशा के दोष कम करने के उपाय
- जल तत्व वाली तस्वीरें लगाएं
पश्चिम दिशा की दीवार पर झरने, झील, नदी जैसी जल तत्व से संबंधित तस्वीरें लगाना शुभ माना गया है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और शनि के दोष कम होते हैं।
- वरुण यंत्र की स्थापना
इस दिशा में वरुण यंत्र लगाने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं। यह घर में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति बढ़ाने में सहायक होता है।
- भारी फर्नीचर रखें
पश्चिम दिशा भारी फर्नीचर रखने के लिए शुभ मानी जाती है। इससे घर में स्थिरता और सुरक्षा का प्रभाव बढ़ता है।
- सफाई और व्यवस्थित रखना
शनि को प्रसन्न करने के लिए पश्चिम दिशा को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना आवश्यक है। गंदगी और अव्यवस्था इस दिशा में दोष उत्पन्न कर सकती है।
- सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें
इस दिशा में रंग, प्रकाश और सजावट का ध्यान रखें। सकारात्मक वस्तुएं और व्यवस्थित वातावरण शनि की कृपा बनाए रखते हैं।
शनि ग्रह की पश्चिम दिशा पर विशेष ध्यान देना घर में सुख, समृद्धि और स्थिरता के लिए आवश्यक है। इस दिशा में किचन, बेडरूम, मंदिर, टूटा सामान, बालकनी और बाथरूम जैसी गलतियां न करने से जीवन में परेशानियों से बचा जा सकता है। इसके साथ ही जल तत्व वाली तस्वीरें, वरुण यंत्र, भारी फर्नीचर और सफाई को बनाए रखना शनि ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा का सही प्रबंधन जीवन में संतुलन और समृद्धि लाता है।