अमेरिका की वेनेजुएला कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के लिए यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की को पकड़ने का प्रयास सैन्य, रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से बेहद जोखिम भरा है।
World News: वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। पहली बार ऐसा हुआ जब अमेरिकी सेना ने किसी देश की राजधानी में घुसकर वहां के सिटिंग राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया और अपने साथ अमेरिका ले गई। अमेरिका इसे एक्ट ऑफ वॉर नहीं मान रहा है। वॉशिंगटन का तर्क है कि निकोलस मादुरो एक अपराधी हैं और उनके खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलेगा। इसी घटनाक्रम के बाद अब दुनिया में यह सवाल उठ रहा है कि क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यूक्रेन में ऐसा ही कोई कदम उठा सकते हैं।
ट्रंप का वेनेजुएला प्लान
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला में राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर सकता है, तो क्या रूस यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ ऐसा करने की कोशिश करेगा। हालांकि ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन के लिए यूक्रेन में ट्रंप जैसा दांव खेलना लगभग नामुमकिन है। इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं, जो यूक्रेन को वेनेजुएला से बिल्कुल अलग स्थिति में खड़ा करती हैं।
कीव की सुरक्षा अभेद्य किले जैसी

यूक्रेन की राजधानी कीव पिछले तीन साल से युद्ध की स्थिति में है। रूस के साथ जारी संघर्ष ने कीव को दुनिया की सबसे ज्यादा सुरक्षित राजधानियों में बदल दिया है। यहां हर वक्त हाई अलर्ट रहता है। पश्चिमी देश यूक्रेन के साथ लगातार इंटेलिजेंस इनपुट साझा करते हैं। ड्रोन, सैटेलाइट और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से कीव की सुरक्षा पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाती है। ऐसे माहौल में किसी विदेशी सेना के लिए राजधानी में घुसकर राष्ट्रपति को पकड़ना बेहद मुश्किल काम है।
जेलेंस्की का ठिकाना और सुरक्षा व्यवस्था
राष्ट्रपति जेलेंस्की जहां रहते हैं, वह इलाका खुद में एक सैन्य किला माना जाता है। वहां कई लेयर की सुरक्षा है। सैनिक, बख्तरबंद वाहन और एयर डिफेंस सिस्टम हर समय तैनात रहते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत जवाब देने की क्षमता मौजूद है। यही वजह है कि रूस के लिए जेलेंस्की तक पहुंचना सिर्फ सैन्य चुनौती नहीं बल्कि रणनीतिक जोखिम भी बन सकता है।
कीव तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती

यूक्रेन का भूगोल भी रूस के खिलाफ जाता है। कीव रूसी सीमा से काफी अंदर स्थित है। वहां पहुंचने के लिए यूक्रेन के बड़े हिस्से से गुजरना होगा। इसका मतलब यह है कि रूसी सेना को लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ेगा। रास्ते में यूक्रेनी सेना के साथ सीधी भिड़ंत होगी और हर मूवमेंट पर पश्चिमी देशों की नजर रहेगी।
नाटो सर्विलांस का खतरा
अगर रूसी विमान या विशेष बल किसी तरह कीव तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, तो नाटो देशों का सर्विलांस सिस्टम तुरंत अलर्ट हो जाएगा। अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। ऐसे में रूस का कोई भी बड़ा कदम तुरंत इंटरनेशनल लेवल पर एक्सपोज हो जाएगा। इससे रूस पर दबाव और बढ़ेगा और मिशन फेल होने की संभावना ज्यादा रहेगी।
जेलेंस्की की गिरफ्तारी से भी नहीं बदलेगा युद्ध

मान लें कि तमाम मुश्किलों को पार करते हुए रूसी सेना जेलेंस्की को गिरफ्तार कर भी लेती है, तब भी यूक्रेन की स्थिति वेनेजुएला जैसी नहीं होगी। यूक्रेन में सत्ता किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। वहां मजबूत सैन्य कमांड स्ट्रक्चर है। राष्ट्रपति के बाद भी सेना और सरकार काम करती रहेगी। इससे रूस को रणनीतिक बढ़त मिलने की संभावना बेहद कम है।
यूक्रेनी सेना की तैयारी
यूक्रेनी सेना पिछले तीन साल से लगातार युद्ध में शामिल है। सैनिकों को आधुनिक हथियारों और पश्चिमी ट्रेनिंग का फायदा मिला है। युद्ध के दौरान सेना ने खुद को तेजी से एडाप्ट किया है। ऐसे में अगर रूस कोई बड़ा कदम उठाता है, तो उसे भारी सैन्य और जन विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
जेलेंस्की को वैश्विक समर्थन
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित समर्थन मिला था। कई देश पहले से ही उन्हें अवैध राष्ट्रपति मानते थे। इसके उलट जेलेंस्की को अमेरिका, यूरोप और नाटो देशों का खुला समर्थन हासिल है। रूस की ओर से कोई भी आक्रामक कदम इन सभी देशों को एकजुट कर सकता है।
अगर रूस जेलेंस्की के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन करता है, तो पश्चिमी देश तुरंत यूक्रेन के साथ खड़े हो जाएंगे। हथियार, फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट पहले से कहीं ज्यादा तेज हो सकता है। इससे युद्ध का दायरा और बड़ा हो जाएगा, जो रूस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।











