यूक्रेन वार्ता अपडेट! शांति प्रस्ताव में बदलाव, फिर भी मतभेद गहरे, जानें पुतिन के सलाहकार ने क्यों कहा ऐसा

यूक्रेन वार्ता अपडेट! शांति प्रस्ताव में बदलाव, फिर भी मतभेद गहरे, जानें पुतिन के सलाहकार ने क्यों कहा ऐसा

यूक्रेन संकट पर मॉस्को में हुई US-Russia वार्ता को उपयोगी बताया गया है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। पुतिन के सलाहकार उशाकोव के अनुसार territories और शर्तों पर और चर्चा जरूरी है, जबकि शांति प्रस्ताव में संशोधन जारी है।

US-Russia Meeting: यूक्रेन में लगभग चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस और अमेरिका के बीच मॉस्को में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। यह बैठक चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बनाई जा रही शांति रूपरेखा (peace framework) का हिस्सा थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के वरिष्ठ विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस वार्ता को उपयोगी बताया है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि अभी बहुत काम बाकी है।

मॉस्को में उच्च स्तर की बैठक

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से क्रेमलिन में मुलाकात की। यह मुलाकात कई घंटों तक चली और इसी दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच यूक्रेन युद्ध पर विस्तृत चर्चा की गई।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ट्रंप प्रशासन अपने peace agreement के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहा है। रूस और अमेरिका दोनों ही इस मुद्दे को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि लंबे समय से चली आ रही लड़ाई को किसी दिशा में ले जाया जा सके।

वार्ता में क्या हुआ, नहीं किया गया सार्वजनिक

अमेरिका और रूस दोनों पक्षों ने तय किया कि वे अपनी बातचीत के मुख्य बिंदु सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय इस वजह से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूक्रेन मुद्दा बेहद संवेदनशील है और किसी भी बयान का बड़ा कूटनीतिक असर हो सकता है।

फिर भी, यूरी उशाकोव ने वार्ता के बारे में इतना जरूर कहा कि चर्चा लगभग पाँच घंटे चली और इसे उन्होंने “काफी उपयोगी, कंस्ट्रक्टिव और ठोस” बताया। इस बातचीत में शांति प्रस्ताव (peace proposal) के फ्रेमवर्क पर विस्तार से चर्चा की गई है।

किन मुद्दों पर बने मतभेद

उशाकोव ने साफ किया कि अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। खासकर इलाकों (territories) से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हुआ है। यह वही मुद्दा है जो यूक्रेन युद्ध की जड़ में है।

उन्होंने कहा कि “कुछ अमेरिकी प्रस्ताव कुछ हद तक ठीक लगते हैं लेकिन उन पर और चर्चा की जरूरत है। हमें जो शब्द सुझाए गए थे, उनमें से कुछ हमें सूट नहीं करते, इसलिए काम जारी रहेगा।”

यानी, दोनों पक्ष अपने-अपने हितों के अनुसार भाषा, शर्तों और ढांचे को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। उशाकोव ने यह भी संकेत दिया कि असहमति के कुछ और बिंदु भी हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

अमेरिका के Peace Proposal में बदले गए महत्वपूर्ण बिंदु

कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शांति प्रस्ताव सामने आया था। उस प्रस्ताव को लेकर माना जा रहा था कि वह रूस के पक्ष में है। इसी वजह से यूक्रेन ने इसे शुरुआती दौर में ही खारिज कर दिया था।

पहले प्रस्ताव में यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र डोनबास का बड़ा हिस्सा रूस को सौंपने और यूक्रेन के NATO में शामिल होने जैसी बेहद संवेदनशील शर्तें शामिल थीं। यूक्रेन के लिए यह शर्तें स्वीकार करना बेहद मुश्किल था।

अब जानकारी सामने आई है कि शांति प्रस्ताव के फ्रेमवर्क में बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इन बदलावों के बारे में भी सीमित जानकारी ही साझा की गई है, पर यह कहा जा रहा है कि नया ढांचा यूक्रेन के लिए अधिक “उपयुक्त” है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी इसे “बेहतर” बताया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया

जहाँ एक ओर स्टीव विटकॉफ रूस की यात्रा पर हैं, वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की यूरोप के दौरे पर हैं। वे आयरलैंड में हैं और उन देशों को धन्यवाद दे रहे हैं जिन्होंने रूस के हमले के खिलाफ यूक्रेन का साथ दिया है।

जेलेंस्की ने कहा कि “काफी बातचीत हो रही है, लेकिन हमें नतीजे चाहिए। हमारे लोग हर दिन मर रहे हैं। मैं राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने के लिए तैयार हूं।”

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