यूपी में Special Intensive Revision के बाद वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी हुआ। इसमें 25 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट नाम सामने आए। मतदाताओं को 6 फरवरी तक सुधार का मौका दिया गया है।
UP: उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूची का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। 6 जनवरी को प्रकाशित इस ड्राफ्ट लिस्ट के साथ ही चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाताओं के पास अब अपनी जानकारी ठीक कराने का पूरा मौका है। आगामी चुनावों से पहले एक साफ, सटीक और भरोसेमंद वोटर लिस्ट तैयार करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
ड्राफ्ट लिस्ट में सामने आई बड़ी संख्या
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 25 लाख से ज्यादा ऐसे नाम सामने आए हैं, जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए। यह खुलासा SIR अभियान के दौरान हुआ, जिसमें घर-घर जाकर रिकॉर्ड की जांच की गई। चुनाव आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी थी ताकि फर्जी, डुप्लीकेट और गलत प्रविष्टियों को समय रहते हटाया जा सके।
यूपी में कुल मतदाताओं की स्थिति
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) नवदीप रिनवा ने जानकारी दी कि प्रदेश में इस समय 12 करोड़ 55 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। यह संख्या ड्राफ्ट लिस्ट के आधार पर सामने आई है। आयोग का कहना है कि यह आंकड़ा आगे आपत्तियों और सुधार के बाद बदल भी सकता है। इसलिए हर मतदाता को अपनी एंट्री जरूर चेक करनी चाहिए।
सुधार के लिए एक महीने का समय
चुनाव आयोग ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। अगर किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से जुड़ा है, छूट गया है, किसी और जगह दर्ज है या उसमें कोई स्पेलिंग और पता संबंधी गलती है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसके लिए 6 जनवरी से 6 फरवरी तक का समय दिया गया है। इस एक महीने की अवधि में दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।
नाम जोड़ने, हटाने की पूरी प्रक्रिया
जो युवा पहली बार वोटर बने हैं और जिनका नाम अभी तक लिस्ट में शामिल नहीं हुआ है, वे भी इस अवधि में आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, जिन लोगों का नाम गलती से शामिल हो गया है या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम हटवाने के लिए भी दावा किया जा सकता है। Election Commission का कहना है कि हर आवेदन की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।
2003 की सूची से नाम गायब, नोटिस जारी होंगे
SIR के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट से मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे मामलों में अब चुनाव आयोग संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी करेगा। उनसे दस्तावेजों के जरिए अपनी पहचान और पात्रता साबित करने को कहा जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि गलत एंट्री या संदिग्ध नामों को हटाया जा सके।
अंतिम वोटर लिस्ट की तारीख तय
चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि 6 फरवरी तक सभी दावे और आपत्तियां निपटा ली जाएंगी। इसके बाद पूरी प्रक्रिया की जांच होगी और 6 मार्च को Final Voter List का प्रकाशन किया जाएगा। यही अंतिम सूची आगामी चुनावों में इस्तेमाल की जाएगी। आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची ज्यादा भरोसेमंद और निष्पक्ष बनेगी।
प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। प्रदेश के सभी 75 जिलों के District Election Officer, 403 विधानसभा क्षेत्रों के Electoral Registration Officer, 42 Assistant Electoral Registration Officer और 16 लाख से ज्यादा Booth Level Officer इस काम में लगाए गए। Volunteers की मदद से बड़ी संख्या में मतदाताओं से संपर्क किया गया और Enumeration Forms जमा किए गए।
फाइनल ड्राफ्ट में कितने वोटर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, अब तक जारी ड्राफ्ट में कुल 12,55,56,25 मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा पूरे प्रदेश में किए गए फील्ड वेरिफिकेशन और दस्तावेजी जांच के बाद सामने आया है। हालांकि, आयोग ने साफ किया है कि आपत्तियों के निपटारे के बाद यह संख्या घट या बढ़ सकती है।
मतदाताओं की जिम्मेदारी क्यों जरूरी
चुनाव आयोग बार-बार यह अपील कर रहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर मतदाता की जिम्मेदारी है कि वह अपनी जानकारी सही रखे। अगर वोटर लिस्ट में गलती रह जाती है, तो मतदान के दिन परेशानी हो सकती है। इसलिए अभी समय रहते लिस्ट की जांच करना जरूरी है।










