हम अक्सर जिस माहौल में रहते हैं, उसी के जैसे बन जाते हैं। समाज और आसपास के लोग हमें जो बताते हैं, हम उसी को अपनी सच्चाई मान लेते हैं और अपनी असीम क्षमता को भूल जाते हैं। यह कहानी एक ऐसे बाज की है जो मुर्गियों के बीच पलकर खुद को मुर्गा ही समझने लगा था। यह कहानी हमें अपनी 'मानसिकता के पिंजरे' को तोड़कर अपनी असली पहचान खोजने के लिए प्रेरित करती है।
मुख्य कहानी
एक बार की बात है, एक किसान को जंगल में एक बाज (Eagle) का अंडा मिला। किसान ने उस अंडे को लाकर अपने खेत में मुर्गियों के दर्बे (coop) में एक मुर्गी के अंडों के साथ रख दिया।
कुछ समय बाद, उस अंडे में से एक सुंदर बाज का बच्चा निकला। लेकिन, क्योंकि वह मुर्गियों के बीच पैदा हुआ था और उन्हीं के साथ पला-बढ़ा, इसलिए वह खुद को भी एक मुर्गी ही समझता था।
वह वही सब करता जो बाकी मुर्गियां करती थीं। वह जमीन पर पड़े दाने चुगता, कीड़े-मकोड़े ढूंढता और मुर्गियों की तरह 'कुड़-कुड़' की आवाजें निकालता। जब उड़ने की बात आती, तो वह भी बाकी मुर्गियों की तरह अपने पंख फड़फड़ाता और बस कुछ फीट ऊपर तक ही उड़ पाता। उसे लगता था कि उसकी दुनिया बस यही जमीन है और वह इससे ऊंचा उड़ने के लिए नहीं बना है।
सालों बीत गए, और वह बाज अब बूढ़ा हो चला था। उसने अपनी पूरी जिंदगी एक मुर्गी की तरह ही जी थी।
एक दिन, वह दाना चुग रहा था, तभी उसकी नजर आसमान में गई। उसने देखा कि नीले आकाश में एक विशाल और राजसी पक्षी बड़ी शान से उड़ रहा है। वह पक्षी बिना अपने पंख हिलाए, हवा की लहरों पर तैर रहा था। उसकी उड़ान में गजब की ताकत और आजादी थी।
बूढ़े बाज ने आश्चर्य से उस पक्षी को देखा और अपने पास खड़ी एक मुर्गी से पूछा, 'अरे, वह ऊपर देखो! वह शानदार पक्षी कौन है?'
मुर्गी ने ऊपर देखा और कहा, 'ओह! वह? वह तो 'बाज' है। वह पक्षियों का राजा है। वह आसमान का स्वामी है।'
बूढ़े बाज ने एक आह भरी और कहा, 'काश! मैं भी उसकी तरह उड़ पाता।'
मुर्गी ने हंसते हुए कहा, 'तुम पागल हो गए हो क्या? ऐसी बातें सोचना भी बंद कर दो। तुम एक 'मुर्गी' हो और मुर्गियां कभी बाज की तरह नहीं उड़ सकतीं। अपनी किस्मत को स्वीकार करो और चुपचाप दाना चुगो।'
बूढ़े बाज ने उस मुर्गी की बात मान ली। उसने फिर कभी ऊपर आसमान की तरफ नहीं देखा। उसने अपनी असलियत जानने की कोशिश ही नहीं की। वह जीवन भर खुद को मुर्गी समझता रहा और अंत में एक मुर्गी की तरह ही मर गया, जबकि वह आसमान का राजा बनकर पैदा हुआ था।
सीख
संगत का असर: यदि आप बाज हैं, लेकिन मुर्गियों के बीच रहेंगे, तो आप भी उड़ना भूल जाएंगे। हम वही बन जाते हैं, जिन पाँच लोगों के साथ हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं।













