Bangladesh Violence: बांग्लादेश में भारतीय मिशनों पर हमला, अलर्ट मोड में मोदी सरकार

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में भारतीय मिशनों पर हमला, अलर्ट मोड में मोदी सरकार

बांग्लादेश में जारी हिंसा के दौरान ढाका, राजशाही और चटगांव स्थित भारतीय मिशनों पर पथराव किया गया। हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ। भारत ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और बांग्लादेश सरकार से जवाब मांगा।

Dhaka: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अशांति अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनती जा रही है। जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। इसी उग्र माहौल के बीच भारत के राजनयिक मिशनों को भी निशाना बनाया गया। ढाका, राजशाही और चटगांव में स्थित भारतीय मिशनों पर रात के समय पथराव किया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

हालांकि राहत की बात यह रही कि इन हमलों में कोई भी भारतीय राजनयिक या अधिकारी घायल नहीं हुआ और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। इसके बावजूद, घटनाओं ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक नई संवेदनशीलता जोड़ दी है।

कहां-कहां हुए हमले

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश की राजधानी ढाका के साथ-साथ राजशाही और चटगांव में स्थित भारतीय मिशनों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मिशनों के मुख्य द्वारों पर पत्थरबाजी की। यह सब उस समय हुआ, जब देश के कई हिस्सों में पहले से ही विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल चुके थे।

रात भर चले इन हमलों ने स्थानीय प्रशासन और अंतरिम सरकार की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय अधिकारियों ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखी और तत्काल नई दिल्ली को पूरी जानकारी दी।

शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा

बांग्लादेश में मौजूदा हिंसा की जड़ें जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मृत्यु से जुड़ी हैं। हादी को पिछले सप्ताह गोली मारी गई थी और इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया था। वहां अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

हादी की मौत की खबर सामने आते ही बांग्लादेश के कई शहरों में आक्रोश फैल गया। विरोध प्रदर्शन तेजी से हिंसक हो गए और सरकारी तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इसी उथल-पुथल के बीच भारतीय मिशनों पर भी हमला किया गया।

भारत ने पहले ही जताई थी सुरक्षा चिंता

इन हमलों से कुछ दिन पहले ही भारत ने बांग्लादेश में अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। बुधवार को नई दिल्ली ने बांग्लादेश के राजदूत रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया था।

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ढाका स्थित भारतीय दूतावास और अन्य मिशनों के आसपास असुरक्षा का माहौल बन रहा है। भारत ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ चरमपंथी तत्व भारतीय प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।

विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि बांग्लादेश में हाल की घटनाओं को लेकर चरमपंथी तत्वों द्वारा फैलाई जा रही झूठी कहानियों को भारत पूरी तरह से खारिज करता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने न तो इन घटनाओं की गहन जांच की और न ही भारत के साथ कोई ठोस सबूत साझा किए।

राजदूत को तलब किए जाने के बाद भारत ने साफ किया था कि वह बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।

भारत विरोधी नारे और आरोप

हिंसा के दौरान बांग्लादेश में कुछ संगठनों ने भारत विरोधी नारे भी लगाए। स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (SAD) के सहयोगी दल नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने आरोप लगाया कि शरीफ उस्मान हादी पर हमला करने वाले लोग हत्या के बाद भारत भाग गए।

एनसीपी ने अंतरिम सरकार से मांग की कि जब तक कथित हमलावरों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को बंद रखा जाए। इन बयानों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

मीडिया संस्थानों पर भी हमला

भारतीय मिशनों के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों पर भी हमला किया। इसके साथ ही देश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान के आवास में भी तोड़फोड़ की गई।

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