भारत के ऑपरेशन सिंदूर का असर अब पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर साफ दिख रहा है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संगठन में नेतृत्व संकट, भरोसे की कमी और अंदरूनी असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
Pakistan: भारत की सुरक्षा एजेंसियों को पाकिस्तान से जुड़ी एक अहम जानकारी हाथ लगी है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा अब अंदरूनी फूट और असंतोष से जूझ रहा है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं और इसकी बड़ी वजह भारत द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने लश्कर-ए-तैयबा की ताकत, नेटवर्क और भरोसे को गहरा झटका दिया है। यही कारण है कि संगठन के भीतर असहमति खुलकर सामने आने लगी है।
ऑपरेशन सिंदूर बना निर्णायक मोड़
भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर वह मोड़ साबित हुआ, जिसके बाद लश्कर-ए-तैयबा का ढांचा बुरी तरह हिल गया। इस ऑपरेशन के दौरान संगठन के कई अहम ठिकाने, लॉजिस्टिक नेटवर्क और सपोर्ट सिस्टम कमजोर हुए।
अधिकारी के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद लश्कर को अपने पुराने ढांचे को फिर से खड़ा करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के भीतर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वह पहले जैसी ताकत और प्रभाव दोबारा हासिल कर पाएगा।
नेतृत्व में असहमति और फैसलों पर सवाल
खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि लश्कर-ए-तैयबा के कुछ शीर्ष नेता हाल के महीनों में लिए गए फैसलों से खुश नहीं हैं। संगठन के अंदर यह धारणा बन रही है कि रणनीतिक स्तर पर गलत निर्णय लिए गए, जिनकी कीमत अब पूरे संगठन को चुकानी पड़ रही है।
कुछ नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और सेना अब पहले की तरह सुरक्षा और संरक्षण देने की स्थिति में नहीं हैं। इस सोच ने संगठन के भीतर भरोसे की नींव को कमजोर कर दिया है।
आईएसआई और पाकिस्तानी सेना से भरोसा टूटा

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकियों और फील्ड कमांडरों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना और आईएसआई अब उन्हें प्रभावी ढंग से बचा नहीं पा रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरह से संगठन को नुकसान हुआ, उसने इस भरोसे को और कमजोर किया है।
सूत्रों के अनुसार, संगठन के अंदर यह चर्चा तेज है कि अब उन्हें “मोहरा” बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन मुश्किल वक्त में कोई साथ खड़ा नहीं होता।
चीन और अमेरिका को लेकर बढ़ती नाराजगी
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह पाकिस्तान सरकार की विदेश नीति भी है। संगठन से जुड़े कई लोगों को लगता है कि पाकिस्तान चीन (China) और अमेरिका (America) के दबाव में जरूरत से ज्यादा झुक रहा है।
बताया जा रहा है कि चीन और अमेरिका दोनों की नजर बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों पर है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार उनके हितों को प्राथमिकता दे रही है, जिससे आतंकी संगठनों के भीतर असहजता बढ़ रही है।
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ता संघर्ष
पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर आंतरिक संघर्ष से जूझ रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KP) में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार हिंसक गतिविधियां चला रही हैं।
इन संगठनों ने सेना की पकड़ को कमजोर कर दिया है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सेना इन चुनौतियों से निपटने में खुद को असमर्थ महसूस कर रही है।
आईएसकेपी को मैदान में उतारने का फैसला
इसी कमजोरी के चलते पाकिस्तानी सेना ने एक नया और विवादित कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना ने इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP) को टीटीपी और बीएलए से लड़ने के लिए शामिल करने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, ISKP को लश्कर-ए-तैयबा के साथ जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। इस फैसले ने लश्कर के भीतर नाराजगी और सवालों को और बढ़ा दिया है।











