भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी पूरी, अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण

भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी पूरी, अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण

भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 के लिए तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। अप्रैल 2026 से गृह सूची और आवास जनगणना शुरू होगी, जबकि फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी। यह प्रक्रिया प्रशासनिक और नीति निर्माण में मदद करेगी।

नई दिल्ली: भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण का पूर्व-परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे देश की पहली डिजिटल जनगणना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले पहले चरण में गृह सूची और आवास जनगणना होगी, जबकि जनसंख्या गणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा।

विशाल डिजिटल अभ्यास के लिए तैयारियाँ

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल जनगणना के लिए उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। लाखों फील्ड स्टाफ की तैनाती, डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग, और डिजिटल अभियान की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई है। अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2026 तक निर्धारित पहले चरण के सुचारू संचालन के लिए सभी स्तरों पर जनगणना अधिकारियों की स्तरीय तैनाती की जाएगी।

जनगणना 2027 के दो चरण

जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण, जिसमें गृह सूचीकरण और आवास जनगणना शामिल है, अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। लद्दाख, जम्मू और कश्मीर के बर्फ से ढके क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनगणना सितंबर 2026 में होगी। दूसरा चरण, यानी जनसंख्या गणना, फरवरी 2027 में आयोजित की जाएगी। यह प्रक्रिया देश की जनसांख्यिकी, धर्म, जाति, भाषा, साक्षरता, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और प्रजनन दर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का संग्रह करेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर को 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से जनगणना 2027 को मंजूरी दी। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पहले ही इस निर्णय के तहत आगामी जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। यह भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी।

डिजिटल जनगणना की विशेषताएँ

जनगणना में लगभग 30 लाख फील्ड वर्कर काम करेंगे और इससे 1.02 करोड़ से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। इसके अलावा लगभग 18,600 तकनीकी कर्मी स्थानीय स्तर पर 550 दिनों तक डिजिटल डेटा प्रबंधन और निगरानी में सहयोग करेंगे। इससे जुड़े कर्मियों के लिए भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर भी बनेंगे। अधिकांश फील्ड वर्कर सरकारी स्कूल शिक्षक होंगे, जो अपने नियमित कर्तव्यों के अतिरिक्त फील्ड विजिट करेंगे।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग

फील्ड स्टाफ को डिजिटल उपकरणों और मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि जनगणना प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।

रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि यह डिजिटल जनगणना भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे जनसांख्यिकी डेटा संग्रहण में तेजी आएगी और गलतियों की संभावना कम होगी। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण संभव होगा, जो नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद करेगा।

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