भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन में तेजी, 2028 तक प्रमुख दिग्गज बनने की योजना

भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन में तेजी, 2028 तक प्रमुख दिग्गज बनने की योजना

भारत 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप बनाने की तैयारी कर रहा है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि AI, EV, मोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग से देश का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और वैश्विक महाशक्ति बनेगा।

New Delhi: भारत तेजी से सेमीकंडक्टर उद्योग में कदम बढ़ा रहा है और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी रूपरेखा साझा की है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन की बढ़ती मांग के कारण सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। भारत 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप का निर्माण करने और वैश्विक सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है।

सेमीकंडक्टर उत्पादन में नई शुरुआत

वैष्णव ने बताया कि भारत ने 10 प्रमुख सेमीकंडक्टर इकाइयों के साथ मजबूत शुरुआत की है। इस वर्ष चार संयंत्र – CG Semi, Keyance Technology, Micron Technology और Tata Electronics (असम में) – वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे। यह कदम भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण के वैश्विक नक्शे पर मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारत की डिजाइन पहलों ने अच्छा काम किया है और इसमें 23 स्टार्टअप शामिल हैं। इन पहलुओं के साथ 313 विश्वविद्यालयों में प्रतिभा विकास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। साथ ही, उपकरण निर्माता भी भारत में संयंत्र स्थापित कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है जो भारत को 2028 तक प्रमुख सेमीकंडक्टर दिग्गज के रूप में खड़ा करेगा।

2028 के बाद और 2032 तक की तैयारी

2028 के बाद भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अगले स्तर पर पहुंचेगा। वैष्णव ने कहा कि प्रतिभा, डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम के साथ भारत 2032 तक प्रमुख सेमीकंडक्टर दिग्गजों में शामिल होगा। इस अवधि तक भारत 3-नैनोमीटर चिप का निर्माण कर सकेगा, जो वैश्विक तकनीकी मानकों के अनुसार अत्याधुनिक होगी।

घरेलू ओएसएटी और फैब्रिकेशन का महत्व

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कई आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) कंपनियां वैश्विक भागीदारों के साथ तालमेल कर रही हैं ताकि भारत में बनाई गई क्षमता का उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि हर नया उद्योग बाजार स्वीकार्यता की कसौटी से गुजरता है और भारतीय संयंत्र भी इसका कोई अपवाद नहीं होंगे। उनकी सफलता उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

सॉवरिन AI और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

वैष्णव ने AI क्षेत्र में भारत के प्रयासों के बारे में भी विस्तार से बताया। आलोचकों का मानना है कि वैश्विक डेटा केंद्रों और पेटेंट पर अमेरिका का प्रभुत्व भारत को लाभ नहीं देता। हालांकि, मंत्री ने कहा कि सॉवरिन AI भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य है। देश के इंजीनियर AI मॉडल विकसित कर रहे हैं, चिपसेट पर काम कर रहे हैं और एप्लीकेशन स्तर पर फोकस कर रहे हैं।

भारत को AI स्टैक की सभी पांच लेयर – एप्लीकेशन, मॉडल, चिपसेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी – में प्रतिस्पर्धी होना होगा। इस दिशा में IT उद्योग भी अग्रसर है और इंडियाएआई मिशन के तहत 12 टीमें आधार मॉडल विकसित कर रही हैं। कई डिजाइन टीमें चिपसेट पर काम कर रही हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगभग 70 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है।

हाल ही में बनाए गए Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act-शांति कानून स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के प्रावधानों का समर्थन करेगा। इससे ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता और पर्यावरण अनुकूलता सुनिश्चित होगी।

इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों का स्थानीयकरण

वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के लिए PLI योजना तेजी पकड़ रही है। इस योजना से भारत की आपूर्ति श्रृंखला बड़े पैमाने पर विकसित होगी। इससे स्थानीय उत्पादन में तेजी आएगी और अधिकांश पुर्जों के लिए घरेलू मांग पूरी की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि निर्यात के लिए कई पुर्जों का निर्माण करने की क्षमता विकसित हो रही है। इसके चलते भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेगा। PLI योजना के तहत स्थानीयकरण बढ़ने से लागत में कमी और आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती आएगी।

भारत की सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की राह

वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारत 2032 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने के लिए रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसमें प्रतिभा विकास, डिज़ाइन पहल, विनिर्माण इकाइयां और ओएसएटी कंपनियों के सहयोग के माध्यम से मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। AI, EV, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन की बढ़ती मांग भारत को इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा रही है।

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