ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना अपनी ताकत में लगातार वृद्धि कर रही है। आक्रामक क्षमता को और मजबूत करने के लिए सेना ने बेलारूस से दर्जनों Berkut-BM कामीकाजी ड्रोन खरीदे हैं।
Kamikaze Drones Berkut-BM: आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति के बीच भारतीय सेना ने अपनी आक्रामक और सटीक मारक क्षमता को और मजबूत किया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने बेलारूस से Berkut-BM कामिकाजी ड्रोन की एक खेप खरीदी है। जेट इंजन से संचालित ये ड्रोन उच्च गति, लंबी मारक क्षमता और सटीक लक्ष्यभेदन के लिए जाने जाते हैं, जिससे सीमा सुरक्षा, निगरानी और प्रिसिजन अटैक में सेना की ताकत बढ़ेगी।
यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन-आधारित क्षमताओं पर बढ़े फोकस का हिस्सा माना जा रहा है। उस अभियान में ड्रोन के प्रभावी उपयोग ने सैन्य योजनाकारों को स्पष्ट कर दिया कि भविष्य के संघर्षों में मानव-रहित प्रणालियाँ निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
Berkut-BM ड्रोन: तकनीक और क्षमताएँ

Berkut-BM का निर्माण बेलारूस की कंपनी मिरोत्वोरेट्स ने किया है। यह एक कामीकाजी (Loitering Munition) ड्रोन है—अर्थात लक्ष्य पर हमला करते समय यह स्वयं नष्ट हो जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- जेट इंजन से संचालित, जिससे तेज प्रतिक्रिया समय
- अधिकतम 410 किमी/घंटा की रफ्तार
- लगभग 150 किलोमीटर तक प्रभावी मारक क्षमता
- उच्च गति के कारण शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता
- सटीक मार्गदर्शन, जिससे सीमित कोलैटरल डैमेज के साथ लक्ष्यभेदन
इन खूबियों के कारण Berkut-BM सीमावर्ती क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों, रडार/एयर-डिफेंस तत्वों और संवेदनशील संरचनाओं पर त्वरित व सटीक प्रहार के लिए उपयोगी माना जा रहा है। सेना के भीतर इन ड्रोन के शामिल होने से सर्जिकल स्ट्राइक और प्रिसिजन अटैक की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। तेज गति और लंबी रेंज इन्हें सीमित समय में लक्ष्य तक पहुँचने में सक्षम बनाती है, जिससे जोखिम और प्रतिक्रिया समय दोनों घटते हैं। इसके अलावा, सीमावर्ती निगरानी और त्वरित आक्रमण के संयोजन से कमांडरों को अधिक विकल्प मिलते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन पर बढ़ा भरोसा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन का उपयोग खुफिया संग्रह, लॉजिस्टिक सपोर्ट और लक्षित हमलों में प्रभावी रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ड्रोन न केवल जोखिम कम करते हैं, बल्कि सटीकता और गति भी बढ़ाते हैं। इसी अनुभव के आधार पर सेना ने ड्रोन यूनिट्स को संरचनात्मक रूप से मजबूत करने की दिशा में कदम तेज किए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सेना 15–20 ‘शक्तिबाण’ रेजिमेंट विकसित कर रही है। ये रेजिमेंट स्वार्म ड्रोन, लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन और आधुनिक सेंसर-सिस्टम से लैस होंगी। लक्ष्य है कि 5 से 500 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकानों पर मिनटों में प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
बताया जा रहा है कि ये रेजिमेंट रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी का हिस्सा होंगी और प्रारंभिक यूनिट्स ने संचालन शुरू भी कर दिया है—जो भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में एक बड़ा संकेत है।












