लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर नियम स्पष्ट, ओम बिरला मतदान कर सकेंगे लेकिन बैठक की अध्यक्षता नहीं

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर नियम स्पष्ट, ओम बिरला मतदान कर सकेंगे लेकिन बैठक की अध्यक्षता नहीं

Budget Session of the Indian Parliament के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार, 9 मार्च से होगी। इसी दिन Lok Sabha में अध्यक्ष Om Birla को पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। 

नई दिल्ली: भारत की संसद में Lok Sabha के अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव को लेकर संवैधानिक और संसदीय नियमों पर चर्चा तेज हो गई है। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार, यदि किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है, तो वह उस बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते, हालांकि उन्हें चर्चा में भाग लेने और मतदान करने का अधिकार बना रहता है।

वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। संसदीय नियमों के तहत जब इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी, तब बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे और अन्य सांसदों की तरह अपनी सीट पर बैठेंगे।

बजट सत्र में प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होने वाला है। इस दौरान लोकसभा में अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की जा सकती है। नियमों के अनुसार, जिस अधिकारी के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया हो, वह उस समय सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता। हालांकि, उन्हें अपना पक्ष रखने और आरोपों के जवाब में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होता है। इसके अलावा वह प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में भी भाग ले सकते हैं।

पूर्व लोकसभा महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ PDT Achary के अनुसार, भारतीय संविधान और संसदीय परंपराओं में यह स्पष्ट प्रावधान है कि अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव आने की स्थिति में वह चर्चा के दौरान अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में लोकसभा अध्यक्ष को सदन के अन्य सदस्यों की तरह बैठना होगा और यदि वह चाहें तो अपने बचाव में बयान भी दे सकते हैं। इसके बाद प्रस्ताव पर मतदान होगा जिसमें उन्हें भी वोट डालने का अधिकार होगा।

मतदान की प्रक्रिया कैसे होगी

चूंकि अध्यक्ष सामान्यतः स्वचालित मतदान प्रणाली का उपयोग नहीं करते, इसलिए इस स्थिति में उन्हें अपना वोट दर्ज कराने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनानी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, उन्हें मतदान के लिए एक स्लिप भरकर अपना वोट पंजीकृत करना पड़ सकता है। यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है क्योंकि सदन की अध्यक्षता करने वाले अधिकारी सामान्य तौर पर मतदान प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होते।

ऐसी स्थिति में अध्यक्ष को सदन में कहां बैठाया जाएगा, इसके लिए नियमों में स्पष्ट प्रावधान नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें संभवतः किसी ऐसे स्थान पर बैठाया जा सकता है जो आम तौर पर राज्यसभा से आने वाले किसी केंद्रीय मंत्री के लिए निर्धारित होता है। यह व्यवस्था इसलिए की जा सकती है क्योंकि प्रस्ताव पर मतदान केवल लोकसभा के सदस्य ही कर सकते हैं। इस दौरान अध्यक्ष को अन्य सांसदों की तरह ही प्रक्रिया का पालन करना होगा।

प्रस्ताव लाने के लिए क्या हैं नियम

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम दो लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। हालांकि नोटिस पर इससे अधिक सांसद भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। भारतीय संविधान के Article 94 of the Constitution of India के तहत लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके अनुसार, यदि सदन में सामान्य बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो अध्यक्ष को पद छोड़ना पड़ता है।

यहां सामान्य बहुमत का अर्थ है कि सदन की प्रभावी सदस्य संख्या के आधार पर मतदान की गणना की जाती है। यानी केवल उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बजाय सदन की कुल प्रभावी सदस्यता के आधार पर बहुमत का निर्धारण किया जाता है।

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