ईरान पर अमेरिका-इस्राइल हमले को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज, कांग्रेस ने पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

ईरान पर अमेरिका-इस्राइल हमले को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज, कांग्रेस ने पीएम मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

Indian National Congress ने शुक्रवार को Pedro Sánchez द्वारा United States और Israel के Iran पर हमले को “बहुत बड़ी गलती” बताए जाने की सराहना की। साथ ही कांग्रेस ने इस मुद्दे पर Narendra Modi की चुप्पी की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह डर और कायरता को दर्शाता है।

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के कथित सैन्य हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारत में भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी Indian National Congress (कांग्रेस) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने स्पेन के प्रधानमंत्री Pedro Sánchez के बयान की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक मंच पर अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति की रक्षा के लिए स्पष्ट रुख अपनाना जरूरी है।

कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर दुनिया भर में राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष का कहना है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और संतुलित रुख दिखाना चाहिए।

स्पेन के प्रधानमंत्री का बयान चर्चा में

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने हाल ही में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना करते हुए इसे “असाधारण और गंभीर गलती” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। सांचेज ने यह भी कहा कि सहयोगी देशों के बीच पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है। 

उनके अनुसार, यदि कोई मित्र देश सही कदम उठाता है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन अगर वह गलती करता है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना भी उतना ही आवश्यक है। उनका यह बयान यूरोप में उन आवाजों में शामिल हो गया है जो पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान की मांग कर रही हैं।

कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर एक पोस्ट साझा करते हुए स्पेन के प्रधानमंत्री के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक नाटो सदस्य देश के नेता द्वारा अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताना साहसिक कदम है।

रमेश ने साथ ही भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दे पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आना कई सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, भारत को वैश्विक मंच पर अपने सिद्धांतों और विदेश नीति के मूल्यों के अनुरूप स्पष्ट बयान देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारत ने परंपरागत रूप से अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन किया है, इसलिए मौजूदा स्थिति में भी उसी नीति का पालन किया जाना चाहिए।

ट्रंप प्रशासन और स्पेन के बीच तनाव

यह मुद्दा उस समय और चर्चा में आया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पेन के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार, स्पेन ने अपने सैन्य अड्डों से ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी सैन्य अभियानों को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंधों पर पुनर्विचार कर सकता है। इस बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया।

विवाद तब और बढ़ गया जब स्पेन के विदेश मंत्री ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के उस दावे का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि स्पेन ने अमेरिकी संदेश को स्पष्ट रूप से समझ लिया है और वह अमेरिकी सेना के साथ सहयोग कर रहा है।

ईरान पर सैन्य कार्रवाई के मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। कुछ देशों ने इसे सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में देखा है, जबकि कई नेताओं और विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। पश्चिम एशिया लंबे समय से भू-राजनीतिक संघर्षों का केंद्र रहा है, और इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य कदम का प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।

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