महाराष्ट्र नगर निगम और बीएमसी चुनावों में मिली शानदार जीत के बाद बीजेपी और शिवसेना के बीच सत्ता साझेदारी को लेकर मामला उलझ गया है। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना ने मेयर पद को लेकर एक नई मांग रखी है, जिसमें पहले एक साल के लिए मुंबई के मेयर पद पर अपना दावा जताया गया है।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मेयर चुनाव को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नगर निगम चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद भी मेयर पद को लेकर भाजपा और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के बीच खींचतान जारी है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत के तीखे बयान ने सियासी माहौल और गर्म कर दिया है। राउत ने न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी अभी भी मुकाबले में मजबूती से खड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) ने मेयर पद को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने रखा है। पार्टी चाहती है कि पहले साल के लिए मेयर पद शिवसेना को दिया जाए, क्योंकि 23 जनवरी को बालासाहब ठाकरे की जन्म शताब्दी है। शिवसेना का तर्क है कि मुंबई और बीएमसी पर दशकों तक शासन करने वाले बालासाहब ठाकरे को यह एक तरह की श्रद्धांजलि होगी।
भाजपा का मेयर बना तो मुंबई शोक में डूबेगी - संजय राउत

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में बेहद आक्रामक अंदाज में कहा,
'जिस दिन भाजपा का मेयर बनेगा, उस दिन मुंबई शोक सागर में डूब जाएगी। भाजपा या गद्दारों का मेयर बनना, मुंबई के लिए काला दिन होगा।'
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए मोरारजी देसाई के दौर का जिक्र किया और भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने बयान को और धार देते हुए संजय राउत ने कहा,
'मैंने ऐसा नहीं कहा कि हमारा मेयर नहीं बनेगा। हम विकल्प देख रहे हैं। भाजपा और शिंदे गुट को लगता है कि खेल खत्म हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। टाइगर अभी जिंदा है। शिवसेना और हमारे सहयोगियों के पास अब भी ऐसा आंकड़ा है जो चुनौती दे सकता है।'
राउत ने यह भी तंज कसा कि एकनाथ शिंदे गुट के पास खुद के 30 नगरसेवक भी नहीं हैं, फिर भी वे मेयर पद की बात कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे गुट की संभावित रणनीति
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) एक बड़ा दांव खेल सकता है। माना जा रहा है कि शिंदे गुट की बार्गेनिंग पावर कम करने के लिए यूबीटी कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकती है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि मेयर चुनाव के दौरान उद्धव गुट के पार्षद सदन से वॉकआउट कर सकते हैं, जिससे सदन की संख्या घट जाएगी।
इससे भाजपा को बहुमत साबित करने में तो आसानी हो सकती है, लेकिन शिंदे गुट का राजनीतिक दबदबा कम हो सकता है। हालांकि, इस रणनीति पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने भाजपा और शिंदे गुट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी भाजपा का मेयर चाहते हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कैसे। भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। शिंदे गुट के पार्षदों को एक होटल में लगभग कैदियों की तरह रखा गया है।










