प्रयागराज माघ मेले में विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का हठ जारी है। इसी क्रम में, बसंत पंचमी के मौके पर भी वे संगम में स्नान करने नहीं जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि “हम पहले जैसे स्नान करने जाते थे, वैसे ही सम्मान के साथ जाएंगे।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक विवाद फिर से सुर्खियों में है। माघ मेले और कुंभ मेला के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमि’ वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जो स्वयं कालनेमि बनकर बैठा है, वह कुछ नहीं कर रहा है, और इस संदर्भ में उन्होंने सीधे तौर पर सीएम योगी को ही कालनेमि कह डाला।
इस विवाद ने पिछले साल माघ मेले के दौरान भड़का था, जब शंकराचार्य और उनके अनुयायियों के साथ सरकारी अधिकारियों के बीच तनाव पैदा हुआ था। इस विवाद के बाद भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी हठधर्मिता जारी रखी है।
बसंत पंचमी पर संगम में नहीं जाएंगे शंकराचार्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ किया कि बसंत पंचमी पर वे संगम में स्नान नहीं करेंगे, और पहले की तरह सम्मान के साथ स्नान करने का उनका नियम कायम रहेगा। उन्होंने कहा कि उनकी यह प्रतिक्रिया सीएम योगी और अधिकारियों के बयान के खिलाफ है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से बसंत पंचमी पर स्नान का अनुरोध किया था।
इस पर शंकराचार्य ने कहा कि मौर्य के बयान ने उन्हें कुछ राहत दी, लेकिन सीएम योगी के बयान में कालनेमि का उल्लेख उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, “जो स्वयं कालनेमि बनकर बैठा है, वह कुछ नहीं कर रहा। साधु बनकर आया था और गोहत्या रोकने की बात की, लेकिन 12 साल से सत्ता में हैं और कोई कार्रवाई नहीं की। यही कालनेमि हैं।

शंकराचार्य ने योगी सरकार पर साधा निशाना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि वे हमेशा अच्छा सोचते हैं और माघ मेले व कुंभ मेला के इतिहास की जानकारी रखते हैं। उन्होंने बताया कि मेला का आयोजन मोदी और योगी सरकार के आने के बाद शुरू नहीं हुआ, बल्कि इसका इतिहास मुगल काल और पेशवाओं से जुड़ा है। शंकराचार्य ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती शंकराचार्यों ने माघ मेला शुरू किया और सनातनियों के साथ स्नान करने का नियम बनाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार उनके योगदान को विखंडित करना चाहती है और उन्हें अपने कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।
शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं के साथ चौपाल की
विवाद के बाद शंकराचार्य ने माघ मेले में श्रद्धालुओं के साथ चौपाल भी आयोजित की। इसमें विभिन्न मत सामने आए। कुछ लोगों ने कहा कि विवाद को बढ़ाना सही नहीं था और दोनों पक्षों को समझौता कर लेना चाहिए था। वहीं, कई ने शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार को अनुचित बताया, खासकर उनके अनुयायियों के साथ किए गए कृत्यों पर—जैसे कि बटुकों की शिखा खींची गई, जिसे गलत करार दिया गया।
कुछ लोगों का मानना है कि शंकराचार्य को पुलिस के आदेश का पालन करना चाहिए था और पैदल यात्रा करनी चाहिए थी, ताकि विवाद टाला जा सके। हालांकि, कुछ ने इसे राजनीतिक रंग भी देने की कोशिश की और उन्हें कांग्रेस से जोड़कर देखा।











