ED का PMLA एक्शन! जेपी ग्रुप की वित्तीय गतिविधियों पर बढ़ी निगरानी

ED का PMLA एक्शन! जेपी ग्रुप की वित्तीय गतिविधियों पर बढ़ी निगरानी

ED ने जेपी ग्रुप की 400 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया। जांच मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डायवर्जन की है, जिसमें जयप्रकाश सेवा संस्थान और पेज-3 बिल्डटेक प्रमुख रूप से शामिल हैं।

ED Action: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी ग्रुप (Jaypee Group) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जयप्रकाश सेवा संस्थान (JSS) और पेज-3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की करीब 400 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच कर दिया है। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत उठाया गया है। ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस ने बुधवार को इस कार्रवाई की जानकारी एक ऑफिशियल बयान के माध्यम से दी।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कार्रवाई

ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जेपी ग्रुप की कंपनियों जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL), जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) और उनकी संबंधित कंपनियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कथित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन की जांच चल रही है। यह कार्रवाई खासकर जेपी विस्टाउन और जेपी ग्रीन्स हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है।

आरोपों की रूपरेखा

ईडी ने जांच दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की थी। इन FIR में JIL, JAL और उनके प्रमोटरों व निदेशकों, जिनमें मनोज गौर भी शामिल हैं, पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, इन कंपनियों ने फ्लैट खरीदारों से पैसे लिए लेकिन उनका इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए नहीं किया। इसके बजाय, पैसा अन्य जगहों पर डायवर्ट किया गया। परिणामस्वरूप कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए और खरीदारों को लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

25,000 से ज्यादा घर खरीदार प्रभावित

ईडी की जांच में पता चला कि जयप्रकाश एसोसिएट्स और जेपी इंफ्राटेक ने 25,000 से अधिक घर खरीदारों से करीब 14,599 करोड़ रुपये जुटाए। इन फंड्स का एक बड़ा हिस्सा कंस्ट्रक्शन के अलावा अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इनमें जेपी सेवा संस्थान (JSS), जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड (JHL), और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (JSIL) जैसी ग्रुप की दूसरी कंपनियां शामिल थीं।

जांच में यह भी सामने आया कि JSS के मैनेजिंग ट्रस्टी मनोज गौर इस डायवर्ट किए गए फंड्स के मुख्य लाभार्थी थे। इसका मतलब है कि JSS को भेजा गया पैसा सीधे उन्हें मिला।

पेज-3 बिल्डटेक और अन्य कंपनियों का रोल

ईडी ने पाया कि JIL और JAL की संपत्तियों को पेज-3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी अन्य कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। ऐसा कथित तौर पर हनी कटियाल के नियंत्रण और मालिकाना हक में हुआ। इस ट्रांसफर से जुड़े वित्तीय और दस्तावेजी सबूतों को भी एजेंसी ने जब्त किया है।

पहले की छापेमारी

इससे पहले, 23 मई 2025 को ईडी ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में JAL और JIL के 15 कार्यालयों और अन्य ठिकानों पर छापे मारे थे। इस दौरान बड़ी मात्रा में फाइनेंशियल और डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए थे। इन दस्तावेजों से मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डायवर्जन के साक्ष्य प्राप्त हुए।

खरीदारों और निवेशकों के लिए असर

इस कार्रवाई से जेपी ग्रुप के फ्लैट खरीदारों और निवेशकों को सीधा फायदा हो सकता है। जब संपत्तियों को अटैच किया जाता है, तो कंपनी की वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी बढ़ जाती है। इससे भविष्य में फंड डायवर्जन और अन्य अनियमितताओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा।

जांच की कानूनी प्रक्रिया

ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह अटैचमेंट अस्थायी है और जांच के दौरान संपत्ति पर कब्जा रखा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद अदालत और संबंधित प्राधिकरणों के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। यह कदम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत लिया गया है, जो भारत में वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध धन के लेन-देन को रोकने के लिए बनाया गया है।

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