अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमले की खबरों के बीच यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei को निशाना बनाकर मार दिया गया है।
नई दिल्ली: प्रख्यात भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक स्तर पर गंभीर संकट पैदा कर सकता है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
रॉय ने अपनी नई किताब “मदर मैरी कम्स टू मी” पर आयोजित एक चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान, इस्फहान और बेरूत जैसे शहर हिंसा की चपेट में हैं और क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में दुनिया के लोगों के लिए इन शहरों में हो रही तबाही पर ध्यान देना और मानवीय दृष्टिकोण से स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।
ईरान हमले को बताया अवैध
रॉय ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक शांति के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके अनुसार किसी भी संप्रभु देश पर इस तरह का हमला गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों में आम नागरिकों और बच्चों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रॉय ने कहा कि हिंसा और सैन्य कार्रवाई का सबसे बड़ा असर हमेशा आम लोगों पर पड़ता है।
लेखिका ने गाजा में चल रहे संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। उनके मुताबिक युद्ध और सैन्य हमले समस्या का समाधान नहीं बल्कि उसे और जटिल बनाते हैं।

वैश्विक संकट की चेतावनी
अरुंधति रॉय ने कहा कि अगर संघर्ष और बढ़ता है और इसमें अधिक देशों की भागीदारी होती है, तो यह वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। उन्होंने परमाणु हथियारों के खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया पहले ही एक अस्थिर दौर से गुजर रही है। रॉय ने हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास हमें बताता है कि युद्ध किस तरह विनाशकारी परिणाम ला सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और परमाणु हथियारों की मौजूदगी दुनिया को बड़े पैमाने पर विनाश की ओर धकेल सकती है। रॉय ने भारत सरकार की विदेश नीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आना चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट रुख के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उनका कहना था कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र से उम्मीद की जाती है कि वह वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में स्पष्ट आवाज उठाए।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर टिप्पणी
चर्चा के दौरान रॉय ने हाल के समय में भारत और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। रॉय के अनुसार वैश्विक राजनीति में किसी भी देश को अपनी विदेश नीति इस तरह बनानी चाहिए कि वह राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और न्याय के सिद्धांतों का भी सम्मान करे।
हालांकि रॉय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश में राजनीतिक परिवर्तन बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के जरिए नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार वास्तविक बदलाव हमेशा जनता की भागीदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही आता है। उन्होंने कहा कि चाहे अमेरिका हो, इजरायल, ईरान या भारत—किसी भी देश की सरकार में बदलाव का रास्ता लोकतांत्रिक होना चाहिए।












