G20 बैठक के बाद पीएम मोदी की दिल्ली वापसी, कई रणनीतिक चर्चाओं ने दिया नया वैश्विक संदेश

G20 बैठक के बाद पीएम मोदी की दिल्ली वापसी, कई रणनीतिक चर्चाओं ने दिया नया वैश्विक संदेश

जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका से दिल्ली लौटे। इस यात्रा में उन्होंने कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की और AI, स्वास्थ्य तंत्र, सुरक्षा मुद्दों तथा विकास मॉडल पर भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से रखीं।

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद सोमवार सुबह दिल्ली लौट आए हैं। यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस दौरान पीएम मोदी ने कई शीर्ष विश्व नेताओं से मुलाकात की। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।

दक्षिण अफ्रीका की इस यात्रा को पीएम मोदी ने “सार्थक और प्रभावी” बताया है। उन्होंने कहा कि जी20 शिखर सम्मेलन ने समृद्ध और टिकाऊ ग्रह (Sustainable Planet) के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही, उन्होंने सम्मेलन की मेजबानी के लिए दक्षिण अफ्रीका के लोगों और राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का विशेष धन्यवाद दिया।

जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन की अहमियत

जोहान्सबर्ग में आयोजित इस जी20 सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक मंच पर इकट्ठा हुए। भारत के लिए यह सम्मेलन कई मायनों में महत्त्वपूर्ण रहा क्योंकि यहां पीएम मोदी ने न केवल वैश्विक विकास मॉडल पर अपनी बात रखी, बल्कि उन मुद्दों पर भी जोर दिया जिनका सीधा संबंध वैश्विक स्थिरता और मानवता के भविष्य से जुड़ा है।

सम्मेलन में पीएम मोदी ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे, जिनमें AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए Global Agreement, Global Health Response Team बनाने का सुझाव, और Drug-Terror Nexus के खिलाफ जी20 पहल शामिल थीं। इन सुझावों को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और भारत की नेतृत्वकारी भूमिका भी और मजबूत हुई।

पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान कई देशों के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा शामिल रहे।

इन मुलाकातों के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और विकास सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि इन सभी मुलाकातों ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने का अवसर दिया है। भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोण अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि वैकल्पिक वैश्विक समाधान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जी20 सम्मेलन पर पीएम मोदी का बयान

सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जोहान्सबर्ग में आयोजित यह जी20 बैठक बेहद सफल रही। उनके अनुसार यह शिखर सम्मेलन एक Prosperous और Sustainable Planet के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के नेताओं के साथ हुई बातचीत और चर्चाएं न केवल सार्थक रहीं, बल्कि भविष्य में कई देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करेंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि इस सम्मेलन का हर सत्र वैश्विक चुनौतियों को समझने, नए समाधान तैयार करने और बेहतर सहयोग स्थापित करने की दिशा में अहम रहा। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी और आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अध्याय खोले हैं।

वैश्विक विकास मानदंडों पर पुनर्विचार की ज़रूरत

पीएम मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया को अब Global Development Models पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार पारंपरिक मॉडल आज की चुनौतियों का समाधान नहीं दे पा रहे। इसलिए एक ऐसे विकास ढांचे की जरूरत है जो समावेशी हो और सभी देशों, विशेषकर विकासशील राष्ट्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दे।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर भविष्य बनाना है तो विकास नीतियों को वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि मानव कल्याण से बड़ा कोई एजेंडा नहीं होना चाहिए।

AI के दुरुपयोग पर वैश्विक समझौते की मांग

सम्मेलन में पीएम मोदी ने Artificial Intelligence (AI) के दुरुपयोग की ओर दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि AI एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसका दुरुपयोग मानवता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी वजह से एक Global AI Agreement की आवश्यकता है ताकि इस तकनीक का उपयोग सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी ढंग से हो।

उन्होंने यह भी कहा कि AI के उपयोग को विनियमित (Regulated) करना आज की सबसे बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी है। अगर दुनिया इस दिशा में समय पर कदम नहीं उठाती, तो गलत हाथों में तकनीक का जाना कई अनचाही समस्याओं को जन्म दे सकता है।

स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने का प्रस्ताव

पीएम मोदी ने वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि दुनिया को Global Health Response Team का गठन करना चाहिए ताकि किसी भी महामारी, आपदा या स्वास्थ्य संकट का त्वरित और समन्वित समाधान निकल सके। कोविड-19 महामारी ने साफ कर दिया कि देशों के बीच तालमेल का अभाव कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत ने दुनिया को सस्ती वैक्सीन, दवाइयों और मेडिकल सप्लाई के जरिए समर्थन देकर यह साबित किया है कि स्वास्थ्य सुरक्षा मानवता की साझा जिम्मेदारी है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्वास्थ्य तंत्र की जरूरत पर जोर दिया।

मादक पदार्थ–आतंकवाद गठजोड़ पर सख्ती

जी20 सम्मेलन में पीएम मोदी ने Drug-Terror Nexus यानी मादक पदार्थ–आतंकवाद गठजोड़ पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह गठजोड़ दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। इस पर कड़ी कार्रवाई करना जरूरी है क्योंकि अवैध ड्रग्स की तस्करी कई देशों में आतंकी गतिविधियों की फंडिंग का बड़ा साधन बन चुकी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि जी20 देशों को मिलकर इस खतरे का मुकाबला करने के लिए एक विशेष पहल शुरू करनी चाहिए। भारत लंबे समय से इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठा रहा है और अब यह समय है कि दुनिया मिलकर कार्रवाई करे।

UNSC सुधारों की ज़रूरत पर जोर

सम्मेलन में पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की ज़रूरत भी दोहराई। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र प्रणाली अभी भी पुरानी संरचना पर काम कर रही है। ऐसे में UNSC सुधार अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक अनिवार्यता (Global Necessity) बन चुके हैं।

उन्होंने भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के IBSA समूह को यह स्पष्ट संदेश देने की जरूरत बताई कि वैश्विक संस्थाओं में परिवर्तन अब टाला नहीं जा सकता। आधुनिक विश्व की चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं प्रतिनिधित्व और अधिकारों के संतुलन के साथ काम करें।

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