इलाहाबाद हाई कोर्ट से नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को बड़ा झटका, सहारनपुर हिंसा मामले में चारों याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट से नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को बड़ा झटका, सहारनपुर हिंसा मामले में चारों याचिकाएं खारिज

उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने बुधवार को सहारनपुर हिंसा मामले में दर्ज आपराधिक केस की कार्रवाई रद्द करने की मांग वाली चंद्रशेखर आजाद की याचिका को खारिज कर दिया। 

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक अहम कानूनी खबर में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने सहारनपुर हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों में राहत देने से इनकार करते हुए उनकी चारों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस फैसले को चंद्रशेखर आजाद के लिए कानूनी मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण setback के तौर पर देखा जा रहा है।

यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकलपीठ में सुनवाई के लिए आया था, जहां जस्टिस समीर जैन ने बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने इससे पहले 27 नवंबर को इस प्रकरण में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अब निर्णय सुनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।

क्या है सहारनपुर हिंसा मामला

चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ सहारनपुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में दर्ज हिंसा के मामले से यह विवाद जुड़ा है। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता सुधीर कुमार गुप्ता द्वारा चंद्रशेखर आजाद और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि हिंसा के दौरान चक्का जाम किया गया, तोड़-फोड़ की गई और एक पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया गया।

इस मामले में चंद्रशेखर आजाद पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं—147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़े की साझा जिम्मेदारी) और 435 (आगजनी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। फिलहाल यह मामला सहारनपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत (विशेष न्यायाधीश/एडीजे) में विचाराधीन है।

हाई कोर्ट में क्या थी मांग

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में कुल चार याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं में उन्होंने सहारनपुर हिंसा से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि जिन घटनाओं को आधार बनाकर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, वे एक ही घटना से जुड़ी हुई हैं, इसलिए दूसरी एफआईआर दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है।

याचिकाओं में यह भी कहा गया कि एक ही घटना के लिए कई मुकदमे चलाना न्यायसंगत नहीं है और इससे आरोपी के मौलिक अधिकारों का हनन होता है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद के इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही घटनाएं एक जैसी प्रतीत हों, लेकिन यदि घटना स्थल अलग-अलग हैं तो दूसरी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस को पूरक चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल के इस चरण में अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग कर न तो कार्यवाही को रद्द किया जा सकता है और न ही आरोप पत्रों को पहली एफआईआर का पूरक मानने का निर्देश दिया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, ये सभी पहलू ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तय किए जाएंगे।

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