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जापान में बोले पीएम मोदी, ग्लोबल साउथ और रूस-यूक्रेन पर भी चर्चा

जापान में बोले पीएम मोदी, ग्लोबल साउथ और रूस-यूक्रेन पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान में कहा कि भारत और चीन का सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय शांति के लिए आवश्यक है। उन्होंने ग्लोबल साउथ, रूस-यूक्रेन संघर्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी पर भी चर्चा की।

PM Modi: पीएम नरेंद्र मोदी ने जापान में एक साक्षात्कार में कहा कि भारत और चीन का सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को आपसी सम्मान, साझा हित और परस्पर संवेदनशीलता के आधार पर रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

भारत और चीन का स्थिर संबंध, क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन जैसे दो बड़े पड़ोसी देशों का स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यदि ये दोनों देश पूर्वानुमानित और भरोसेमंद तरीके से अपने संबंधों को आगे बढ़ाएंगे तो इसका फायदा सिर्फ इन देशों को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मिलेगा।

चीन की यात्रा का महत्व और एससीओ शिखर सम्मेलन

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर वे तियानजिन जा रहे हैं, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले साल कज़ान में हुई उनकी बैठक के बाद से भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार और सकारात्मक प्रगति हुई है। वर्तमान वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को देखते हुए, भारत और चीन दोनों प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में मिलकर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की तैयारी

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से बढ़ाने को तैयार है। इसमें आपसी सम्मान, साझा हित और परस्पर संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विकास संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और संवाद को मजबूत करने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है।

जापान के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की "खुले और मुक्त हिंद-प्रशांत" नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत के 'विजन महासागर' और 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' के विचारों के साथ पूरी तरह सामंजस्य रखती है। भारत और जापान दोनों इस क्षेत्र को शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करते हुए सहयोग को बढ़ावा देंगे।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख

प्रधानमंत्री मोदी ने रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ हालिया संवाद का ज़िक्र किया और कहा कि भारत ने इस संघर्ष पर सैद्धांतिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की ने भारत के रुख की सराहना की है। मोदी ने कहा कि भारत संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्रोत्साहित कर रहा है और सार्थक और शांतिपूर्ण समाधान में सहयोग करने को तैयार है।

ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना वैश्विक समुदाय का लक्ष्य है। इसके लिए 'ग्लोबल साउथ' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महामारी, संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने ग्लोबल साउथ को प्रभावित किया है। भारत ने इन मुद्दों को वैश्विक एजेंडे में प्रमुखता से उठाने के लिए कई पहलें की हैं।

मोदी ने मिशन लाइफ, CDRI, इंटरनेशनल सोलर एलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो ग्लोबल साउथ के हितों को केंद्र में रखती हैं।

G20, BRICS और Quad में भारत की सक्रिय भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की G20 अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ को शामिल किया गया और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती दी गई। BRICS मंच पर भी भारत सक्रिय रूप से काम कर रहा है। Quad के माध्यम से भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोदी ने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और उन्हें वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप बनाने पर बल देता रहा है।

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