मनरेगा की जगह प्रस्तावित G-RAM-G योजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राहुल गांधी के बयान पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है, जबकि कांग्रेस इसे गरीबों और ग्रामीण अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
Rahul Gandhi News: मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लाई जा रही जी-राम-जी गारंटी योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि यह योजना क्या है। इसी बयान को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी उनकी हिंदू विरोधी मानसिकता को उजागर करती है। वहीं कांग्रेस इसे गरीबों और ग्रामीण भारत के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
क्या था राहुल गांधी का बयान
दिल्ली स्थित जवाहर भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मनरेगा पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने देश के करोड़ों गरीबों को काम का अधिकार दिया है। राहुल गांधी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है और उसकी जगह जी-राम-जी (G-RAM-G) गारंटी जैसी नई योजना लाई जा रही है।
राहुल गांधी ने मंच से कहा कि उन्हें नहीं पता कि जी-राम-जी क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार को लगता है कि मनरेगा को खत्म करके गरीबों का समर्थन खोने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा तो वह गलत सोच रही है।
मनरेगा को लेकर राहुल गांधी का तर्क
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि गरीब व्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। राहुल गांधी ने कहा कि अगर किसान एकजुट होकर सरकार को झुका सकते हैं, तो देश का गरीब और मजदूर वर्ग भी मिलकर मनरेगा को बचा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी लोग एक साथ खड़े हों तो सरकार को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा को मजबूती मिलेगी।
भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा जी-राम-जी योजना के नाम को लेकर टिप्पणी करना सिर्फ राजनीतिक नाटक है।
भाजपा का कहना है कि जी-राम-जी नाम पर आपत्ति जताना कांग्रेस की उस सोच को दिखाता है जो हिंदू प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू विरोधी मानसिकता करार दिया और कहा कि कांग्रेस बार-बार ऐसे मुद्दों पर राजनीति करती है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महात्मा गांधी के नाम और उनकी विरासत को धीरे-धीरे लोगों की यादों से मिटाने की कोशिश कर रही है।
खरगे ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना या उसे कमजोर करना सिर्फ एक योजना में बदलाव नहीं बल्कि गांधी जी के विचारों पर हमला है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र में जोरशोर से उठाएगी।
विपक्ष की रणनीति
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों को विपक्ष की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दल लगातार भाजपा पर यह दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि मनरेगा को कमजोर न किया जाए।
कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मनरेगा के समर्थन में प्रस्ताव लाने के संकेत दिए गए हैं। विपक्ष का मानना है कि यह मुद्दा सीधे गरीब, मजदूर और ग्रामीण मतदाता से जुड़ा है और इसका असर आने वाले चुनावों में भी दिख सकता है।
कर्नाटक विधानसभा में भी दिखा असर
इस पूरे विवाद का असर कर्नाटक विधानसभा में भी देखने को मिला। विधानसभा सत्र के दौरान उस समय हंगामा हो गया जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया।
बताया गया कि भाषण में जी-राम-जी योजना की आलोचना शामिल थी। राज्यपाल के इस फैसले के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस हुई और सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
क्या है जी-राम-जी गारंटी योजना
सरकार की ओर से जी-राम-जी गारंटी योजना को ग्रामीण विकास और रोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश है।
भाजपा का कहना है कि जी-राम-जी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास, आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सरकार का दावा है कि यह योजना आधुनिक जरूरतों के अनुसार बनाई गई है।











