नालंदा जिले में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत हो रही मनमानी को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले के 422 निजी स्कूलों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है, जो आरटीई के प्रावधानों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने सभी संबंधित निजी स्कूलों को दो दिनों के भीतर आरटीई कोटे के तहत उपलब्ध रिक्त सीटों की पूरी जानकारी देने का अल्टीमेटम जारी किया है। तय समय सीमा में जानकारी नहीं देने या लापरवाही बरतने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जानकारी के अनुसार, आरटीई कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित तबके के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाती हैं। लेकिन शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल या तो इन सीटों की सही जानकारी नहीं दे रहे हैं, या फिर जानबूझकर रिक्तियां छिपाकर बच्चों का नामांकन नहीं कर रहे हैं। इसी को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए सभी निजी स्कूलों से स्पष्ट और लिखित रिपोर्ट मांगी है।
डीईओ कार्यालय का कहना है कि कई बार नोटिस और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कुछ निजी स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों के शिक्षा के अधिकार का सीधा हनन हो रहा है। अब विभाग ने साफ कर दिया है कि आरटीई में किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का पालन हर हाल में कराना सुनिश्चित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी में स्कूलों को यह बताना होगा कि उनके यहां कुल कितनी सीटें हैं, आरटीई कोटे के तहत कितनी सीटें आरक्षित हैं, कितनी सीटों पर नामांकन हो चुका है और कितनी सीटें अब भी खाली हैं। इन आंकड़ों की जांच के बाद विभाग भौतिक सत्यापन भी कर सकता है। यदि जांच में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
इस सख्ती के बाद निजी स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। कई स्कूल संचालक विभागीय निर्देशों का पालन करने में जुट गए हैं, वहीं कुछ स्कूलों पर पहले से ही नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कार्रवाई से आरटीई कानून का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का वास्तविक अवसर मिलेगा।
डीईओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तय समय सीमा के बाद भी विवरण उपलब्ध नहीं कराता है, तो उसके खिलाफ मान्यता रद्द करने, आर्थिक दंड लगाने और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि आरटीई कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराना है।
यह पूरा मामला Nalanda जिले से जुड़ा है, जहां शिक्षा विभाग की इस सख्ती के बाद निजी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।











