राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी किया। अदालत ने कहा कि ईडी द्वारा जारी समन का पालन न करने के आरोप साबित नहीं हुए। यह फैसला उन्हें राजनीतिक और कानूनी राहत देता है।
Kejriwal News: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को शराब नीति (Excise Policy) घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate-ED) के समन का पालन न करने के दो मामलों में बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने विस्तृत आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केजरीवाल के खिलाफ आरोप यह थे कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में शामिल होने के लिए ईडी द्वारा जारी किए गए समन (Summons) का जानबूझकर पालन नहीं किया। ईडी ने इस मामले में दो आपराधिक शिकायतें दर्ज की थीं।
ईडी का आरोप
ईडी ने दावा किया था कि केजरीवाल ने 2 नवंबर और 21 दिसंबर 2023 तथा 3 जनवरी और 18 जनवरी 2024 को जारी समन में शामिल नहीं होकर जानबूझकर जांच में सहयोग नहीं किया। ईडी के अनुसार, यह समन शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत जारी किए गए थे।
ईडी का आरोप था कि आबकारी नीति (Excise Policy) के तहत कुछ निजी कंपनियों को थोक व्यापार (Wholesale Trade) में 12 प्रतिशत का लाभ देने की साजिश की गई थी। हालांकि मंत्रिपरिषद की बैठकों (Council of Ministers) के कार्यवृत्त में ऐसी कोई शर्त दर्ज नहीं थी। एजेंसी का दावा था कि विजय नायर और अन्य व्यक्तियों ने साउथ ग्रुप के साथ मिलकर थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ (Unusual Profit Margin) देने की योजना बनाई थी।
जमानत का पूरा इतिहास
केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 20 जून 2024 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट की अवकाशकालीन न्यायाधीश नियाय बिंदु ने उन्हें जमानत (Bail) दे दी थी।

हालांकि, ईडी ने इस आदेश को चुनौती दी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत पर रोक लगा दी। इसके बाद जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत (Interim Bail) दी और ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च पीठ (High Bench) के पास भेज दिया।
इस पूरे कानूनी इतिहास में केजरीवाल के पक्ष ने बार-बार यह तर्क दिया कि उनके खिलाफ जारी किए गए समन अवैध हैं और उन्हें जांच में सहयोग न करने का आरोप न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने क्या कहा
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के फैसले में कहा गया कि दो मामलों में केजरीवाल को जारी समन का पालन न करने का आरोप साबित नहीं हुआ। अदालत ने यह भी माना कि किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने से पहले समुचित कानूनी प्रक्रिया (Due Process) और सबूतों का मूल्यांकन करना अनिवार्य है। फैसले से केजरीवाल को बड़ी राहत मिली है और उन्हें शराब नीति घोटाले से संबंधित दो मामलों में अब सीधे मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
ईडी के आरोप के मुताबिक, केजरीवाल की सरकार द्वारा लागू की गई शराब नीति कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी। इस नीति के तहत थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ दिए जाने का आरोप था।
हालांकि, मंत्रिपरिषद के दस्तावेजों में ऐसा कोई संकेत नहीं था। इस मामले में ईडी का कहना था कि यह एक योजना (Scheme) थी जिसमें कुछ लोगों ने मिलकर निजी लाभ कमाने की कोशिश की। केजरीवाल और AAP के पक्ष ने इस पूरे आरोप को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि नीति में किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ या साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं है।











