क्रोएशिया के ज़ाग्रेब में भारतीय दूतावास पर घुसपैठ और तोड़फोड़ हुई। भारत ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। खालिस्तानी समर्थक तत्वों पर शक जताया गया है।
World News: यूरोप के देश क्रोएशिया में स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले को लेकर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। ज़ाग्रेब में भारतीय दूतावास में घुसपैठ और तोड़फोड़ की घटना सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत ने इस घटना के पीछे भारत विरोधी और अलगाववादी तत्वों का हाथ बताया है और दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय यानी विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना को लेकर एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनयिक परिसरों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य है और इस तरह की घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि वियना संधि (Vienna Convention) के तहत किसी भी देश के दूतावास और राजनयिक परिसर अभेद्य होते हैं। उनकी सुरक्षा करना मेजबान देश की जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने इस मामले को नई दिल्ली और ज़ाग्रेब दोनों जगहों पर क्रोएशियाई अधिकारियों के सामने मजबूती से उठाया है और दोषियों को उनके अवैध और निंदनीय कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
भारत विरोधी तत्वों पर सीधा आरोप
विदेश मंत्रालय ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर भारत विरोधी और अलगाववादी सोच रखने वाले तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की हरकतें न केवल कानून का उल्लंघन हैं बल्कि इनके पीछे छिपी मानसिकता और मंशा को भी उजागर करती हैं।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऐसे कृत्यों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इन गतिविधियों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
खालिस्तानी समर्थकों पर शक
इससे पहले दिन में सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि ज़ाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास में कुछ खालिस्तानी समर्थक तत्वों ने घुसपैठ कर तोड़फोड़ की। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी जांच जारी है, लेकिन भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को गंभीर कूटनीतिक मुद्दे के रूप में देख रहा है।
भारत पहले भी कई देशों में खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर चिंता जताता रहा है और इस तरह की घटनाओं को भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
अहम समय पर हुई घटना

यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब भारत की कूटनीतिक गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में यूरोपीय संघ यानी यूरोपीय संघ (European Union) के कई शीर्ष नेता भारत के दौरे पर आने वाले हैं।
इन नेताओं की यात्रा के दौरान नई दिल्ली में यूरोपीय संघ भारत शिखर सम्मेलन (EU-India Summit) आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है।
मुक्त व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
बताया जा रहा है कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऐसे में भारतीय दूतावास पर हुआ हमला कूटनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं का मकसद भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाना और कूटनीतिक माहौल को प्रभावित करना हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक क्रोएशिया दौरा
गौरतलब है कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रोएशिया का आधिकारिक दौरा किया था। यह दौरा ऐतिहासिक था क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। ज़ाग्रेब पहुंचने पर उनका स्वागत क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच ने किया था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत बातचीत हुई थी।
रिश्तों को दी गई नई गति
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री प्लेनकोविच की बातचीत के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि भारत और क्रोएशिया के संबंधों को तीन गुना गति दी जाएगी। दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई थी।
इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे।
अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और क्रोएशिया के बीच कई अहम समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इनमें कृषि, संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग से जुड़े चार समझौते शामिल थे।
इसके अलावा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद यानी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) और ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय के बीच इंडोलॉजी यानी भारतीय अध्ययन से जुड़े एक विशेष समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए थे।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
भारतीय दूतावास पर हुई इस घटना के बाद विदेशों में भारतीय राजनयिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राजनयिकों और परिसरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि क्रोएशियाई सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।











