केंद्रीय कैबिनेट द्वारा केरल का नाम केरलम करने की मंजूरी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने गहरा विरोध जताया है। ममता बनर्जी ने केंद्र पर तीखा तंज कसा और कहा कि एक दिन सत्ता बदलेगी, तब वे पश्चिम बंगाल का नाम बदलवाएंगी।
कोलकाता: केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह फैसला केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। केरल का नाम बदलने के फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुस्सा जाहिर किया और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि “एक दिन सत्ता बदलेगी और हम पश्चिम बंगाल का नाम बदलवाएंगे।
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को उठाकर चुनावी रणनीति तैयार करेगी, क्योंकि पार्टी पहले से ही राज्य में बांग्ला अस्मिता कार्ड खेल रही है।
केरल का नाम केरलम, ममता बनर्जी की नाराजगी

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों से पहले तटीय राज्य केरल का नाम केरलम करने को मंजूरी दे दी। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस नए नाम को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई। केरल की पिनराई विजयन सरकार ने पहले विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया और इसे केंद्र को भेजा था। केंद्रीय कैबिनेट ने अब इस पर निर्णय ले लिया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केरलम के नाम को मंजूरी मिलने पर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने केंद्र पर बंगाल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की विधानसभा ने राज्य का नाम बांग्ला करने का प्रस्ताव कई बार पारित किया है, लेकिन केंद्र ने अब तक इसे मंजूरी नहीं दी।
ममता बनर्जी के अनुसार, बंगाल के जायज अधिकारों को हमेशा अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने अपनी विधानसभा में बिल पास किया और इसे कई बार केंद्र सरकार को भेजा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हमें मीटिंग के दौरान लंबा इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि राज्य का नाम ‘W’ से शुरू होता है।
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने जुलाई 2018 में प्रस्ताव पास कर पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला करने की योजना बनाई थी। यह प्रस्ताव कई बार केंद्र को भेजा गया, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर है। ममता पहले से ही पश्चिम बंगाल में बांग्ला अस्मिता को लेकर चुनावी रणनीति अपनाती रही हैं।
यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के समय सामने आया है। ममता बनर्जी की टीएमसी जीत की हैट्रिक बनाने और चौथी बार सत्ता में आने की उम्मीद कर रही है। वहीं भाजपा, जो राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर रही है, अब सत्ता में आने की अपनी संभावना बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।












