बॉम्बे हाईकोर्ट ने रमजान के दौरान मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी धर्म के लिए सुरक्षा जोखिम वाले स्थान पर नमाज पढ़ना अनुमति योग्य नहीं है।
Maharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ना धर्म का अधिकार नहीं माना जा सकता, जब सुरक्षा का जोखिम मौजूद हो। रमजान के दौरान मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है और किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
क्या है याचिका
टैक्सी रिक्शा, ओला और उबर एसोसिएशन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। संगठन ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल वन के पास पहले मौजूद छोटे शेड को फिर से बनाने या रमजान के पूरे महीने के लिए करीब 1500 स्क्वायर फीट का स्थान देने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह शेड करीब 30 साल से ड्राइवर्स के लिए नमाज पढ़ने का स्थान रहा है। अप्रैल 2025 में यह शेड मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) द्वारा तोड़ा गया, जिसके बाद ड्राइवर्स को नमाज अदा करने में परेशानी होने लगी।
कोर्ट की सुनवाई
जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनीवाला की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आप नमाज पढ़ने का स्थान खुद तय नहीं कर सकते। आज आप एयरपोर्ट परिसर में जगह मांग रहे हैं, कल ओवल मैदान की मांग करेंगे। किसी भी स्थान पर नमाज अदा करना कोई धार्मिक अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं और सुरक्षा सबसे पहले आती है। किसी भी जगह नमाज पढ़ना तब तक अनुमति नहीं हो सकती जब तक सुरक्षा सुनिश्चित न हो। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि धर्म चाहे कोई भी हो, सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

एयरपोर्ट और सरकार की दलीलें
याचिकाकर्ताओं के वकील शहजाद नकवी और एसबी तालेकर ने कहा कि यह जगह पहले ही अधिकारियों द्वारा तय की गई थी और अब तक कभी कोई सुरक्षा में चूक नहीं हुई। उन्होंने बताया कि आसपास हाल ही में एक मंदिर भी बनाया गया है।
राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ज्योति चौहान ने बताया कि एयरपोर्ट का डोमेस्टिक टर्मिनल हाई सिक्योरिटी और भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है, जहां अक्सर वीवीआईपी लोगों का मूवमेंट होता है। इस कारण किसी भी अनाधिकृत ढांचे की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIL) के सीनियर एडवोकेट विक्रम ननकानी ने कहा कि जो शेड तोड़ा गया था, वह वीआईपी एंट्री गेट के पास था और सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन सकता था। एयरपोर्ट क्षेत्र में पर्याप्त मस्जिदें मौजूद हैं, जिनमें ड्राइवर्स नमाज पढ़ सकते हैं।
कोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि रमजान इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अनुयायी किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एयरपोर्ट अधिकारियों को ज्ञापन सौंप सकते हैं ताकि भविष्य में इस पर विचार किया जा सके।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई अन्य स्थान आवंटित किया जा सकता है। अधिकारियों ने रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया कि कई संभावित स्थान देखे गए, लेकिन भीड़, सुरक्षा और डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई।











