त्योहारी या शादी के सीजन में खर्च बढ़ने पर लोग अक्सर पर्सनल लोन लेते हैं, लेकिन मंजूरी से पहले बैंक कुछ अहम बातों की जांच करते हैं। इनमें आय, क्रेडिट स्कोर, मौजूदा कर्ज, उम्र और नौकरी की स्थिरता शामिल है। इन मानकों पर खरे उतरने वाले लोगों को लोन जल्दी और बेहतर शर्तों पर मिल जाता है।
Personal Loan: त्योहारों और शादियों के मौसम में लोगों की आर्थिक जरूरतें बढ़ जाती हैं, ऐसे में पर्सनल लोन एक आसान विकल्प बन जाता है। हालांकि, बैंक लोन देने से पहले आपकी फाइनेंशियल प्रोफाइल का बारीकी से मूल्यांकन करते हैं। आपकी सैलरी, क्रेडिट स्कोर, मौजूदा कर्ज, उम्र और नियोक्ता की साख जैसे कारक लोन की मंजूरी तय करते हैं। जिन लोगों की आय स्थिर होती है, क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है और जिनका वित्तीय रिकॉर्ड साफ-सुथरा होता है, उन्हें बैंक फटाफट लोन दे देते हैं। सही तैयारी और इन मानकों को समझकर लोन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है।
सैलरी और नौकरी की स्थिरता
लोन देने से पहले बैंक यह सुनिश्चित करता है कि आपकी आय नियमित है या नहीं। बैंक यह देखता है कि आपकी सैलरी कितनी है और क्या आप एक ही कंपनी में लंबे समय से काम कर रहे हैं। आमतौर पर अगर कोई व्यक्ति एक ही संस्था में 1-2 साल से कार्यरत है, तो बैंक उसे भरोसेमंद मानता है। जितनी अधिक सैलरी होगी, लोन मंजूर होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
जो लोग स्वरोजगार में हैं यानी सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं, उन्हें अपनी आमदनी के प्रमाण दिखाने होते हैं। इसमें वित्तीय रिपोर्ट, इनकम टैक्स रिटर्न या बिजनेस से जुड़ी अन्य जानकारी शामिल होती है। बैंक यह देखता है कि आपका व्यवसाय स्थिर है या नहीं और आपकी आय का स्रोत नियमित है या नहीं।
क्रेडिट स्कोर सबसे अहम
पर्सनल लोन पाने में आपका क्रेडिट स्कोर सबसे बड़ा रोल निभाता है। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो बैंक आपको भरोसेमंद मानता है। यह स्कोर बताता है कि आपने अपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर चुकाए हैं या नहीं।
अगर आपकी रिपोर्ट में लेट पेमेंट, डिफॉल्ट या बहुत ज्यादा लोन एप्लिकेशन की एंट्री हैं, तो बैंक के लिए आप जोखिम वाले ग्राहक बन जाते हैं। इसलिए बैंक ऐसे मामलों में लोन देने से बचता है। अपने क्रेडिट स्कोर को नियमित रूप से जांचना जरूरी होता है। अगर रिपोर्ट में कोई गलती है, तो उसे तुरंत सुधारना चाहिए ताकि आपकी प्रोफाइल बेहतर बनी रहे।
वर्तमान कर्ज और देनदारियां
लोन देने से पहले बैंक आपके ऊपर पहले से मौजूद कर्ज का भी हिसाब लगाता है। इसे Debt-to-Income Ratio यानी DTI कहा जाता है। यह अनुपात बताता है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा पहले से ही EMI में जा रहा है।
अगर आपकी आय का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही EMI में खर्च हो रहा है, तो बैंक नया लोन देने में हिचकिचाता है। बैंक ऐसे आवेदकों को प्राथमिकता देता है जिनकी देनदारी कम हो और आय स्थिर हो। अगर आपके पास कई छोटे लोन हैं, तो उन्हें एक साथ कंसॉलिडेट करने से भी आपकी प्रोफाइल बेहतर दिखती है।
उम्र और चुकाने की क्षमता

बैंक आपकी उम्र को भी ध्यान में रखता है। आमतौर पर 21 से 60 वर्ष की आयु वाले लोग पर्सनल लोन के लिए योग्य माने जाते हैं। कम उम्र के आवेदकों के पास लंबा करियर होता है, जिससे बैंक को भरोसा रहता है कि वे समय पर लोन चुका पाएंगे।
हालांकि, बहुत कम उम्र में अगर किसी का फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है या क्रेडिट हिस्ट्री कमजोर है, तो बैंक थोड़ा सतर्क रहता है। वहीं, रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोगों को लोन की अवधि सीमित समय के लिए दी जाती है, ताकि बैंक को भुगतान का भरोसा रहे।
नियोक्ता और पेशेवर प्रोफाइल
आप कहां काम करते हैं, यह भी बैंक के लिए काफी मायने रखता है। अगर आप किसी बड़ी, स्थिर और नामी कंपनी में काम करते हैं, तो आपकी एप्लिकेशन जल्दी मंजूर हो सकती है। बैंक को ऐसे कर्मचारियों पर ज्यादा भरोसा होता है क्योंकि उनके नौकरी छोड़ने या आय में कमी आने का खतरा कम होता है।
वहीं, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट या सरकारी कर्मचारियों जैसे पेशेवरों को भी बैंक विश्वसनीय मानते हैं। इन प्रोफेशन में काम करने वालों की इनकम नियमित मानी जाती है और जोखिम कम होता है।
त्योहारों के समय पर्सनल लोन लेना आम बात है, लेकिन बैंक हर ग्राहक को समान नजर से नहीं देखता। इन पांच बातों पर अगर आपकी स्थिति मजबूत है, तो लोन मंजूरी में कोई अड़चन नहीं आती। इसलिए लोन के लिए आवेदन करने से पहले इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होता है ताकि मंजूरी की प्रक्रिया आसान और तेज हो सके।













