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Radha Ashtami 2025: जाने व्रत रखने का महत्व, पारण का शुभ समय और पूजा विधि

Radha Ashtami 2025: जाने व्रत रखने का महत्व, पारण का शुभ समय और पूजा विधि

राधा अष्टमी 2025 इस साल 31 अगस्त को मनाई जा रही है। व्रत का पारण 1 सितंबर को सुबह 5:59 से 7:35 बजे के बीच किया जाएगा। पारंपरिक विधि अनुसार भोग अर्पित कर और दान देकर व्रत खोला जाता है।

Radha Ashtami: हिंदू धर्म में राधा अष्टमी का व्रत अत्यंत महत्व रखता है। यह पर्व राधा रानी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन श्रद्धालु विशेष उपवास रखते हैं, राधा रानी की पूजा करते हैं और भक्ति भाव से उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। राधा अष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है। इस दिन भक्तजन राधा रानी की आराधना और व्रत के नियमों का पालन करते हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का अनुभव होता है।

राधा अष्टमी व्रत का महत्व

राधा अष्टमी का व्रत रखने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसे रखने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। राधा रानी की भक्ति में लीन रहने से व्यक्ति का मन पाप और नकारात्मक विचारों से दूर रहता है। इस दिन उपवास रखना और राधा रानी की पूजा करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है।

राधा अष्टमी व्रत का पारण समय 2025

राधा अष्टमी के व्रत का पारण 1 सितंबर 2025 को सुबह 5:59 बजे से 7:35 बजे तक के बीच करना शुभ है। पारण का समय निर्धारित पंचांग और शुभ मुहूर्त अनुसार तय किया जाता है, ताकि व्रत का फल सर्वोत्तम प्राप्त हो।

राधा अष्टमी व्रत खोलने की विधि

  1. स्नान और शुद्धि
    सुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें। स्नान के बाद साफ और सात्विक वस्त्र पहनें।
  2. सूर्य देव को जल अर्पित करें
    स्नान और पूजा से पहले सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह व्रती के जीवन में स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता लाता है।
  3. राधा रानी की पूजा
    स्नान और सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद राधा रानी की विधिवत पूजा करें। इस पूजा में राधा रानी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक, अगरबत्ती और फूल चढ़ाएं। भोग में सात्विक पदार्थ जैसे खीर, फल, दूध, हलवा आदि चढ़ाना चाहिए।
  4. दान और परोपकार
    राधा अष्टमी के दिन जरूरतमंदों और गरीबों को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रती को उपवास खोलने से पहले दान करना चाहिए। यह पुण्य कर्म होता है और राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है।
  5. भोग ग्रहण और व्रत का पारण
    पूजा और दान करने के बाद राधा रानी को चढ़ाए गए भोग को ग्रहण करें। इसके साथ ही व्रत खोलें। पारण के समय शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

राधा अष्टमी व्रत के नियम

  • इस दिन व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए।
  • व्रत के दौरान मांसाहारी, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • व्रती को पूरी तरह भक्ति और शुद्ध मन से पूजा करनी चाहिए।
  • राधा रानी की आराधना में ध्यान, भजन और कीर्तन का समावेश होना चाहिए।

व्रत रखने वाले को दिनभर सच बोलना, दूसरों के प्रति करुणा रखना और दया का भाव बनाए रखना चाहिए।

राधा अष्टमी का व्रत न केवल भक्ति और धार्मिकता का प्रतीक है, बल्कि यह मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने का भी माध्यम है। इस व्रत को श्रद्धा और विधि विधान के अनुसार रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान राधा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस साल, 31 अगस्त 2025 को व्रत रखें और 1 सितंबर 2025 को निर्धारित पारण समय में इसे विधिपूर्वक खोलें। पूजा, भोग और दान के माध्यम से आप न केवल धार्मिक फल प्राप्त करेंगे, बल्कि अपने जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी कर सकेंगे।

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