राजस्थान कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सूची में जयपुर शहर गायब, दावेदारों में सहमति न बनने से बढ़ी बेचैनी

राजस्थान कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सूची में जयपुर शहर गायब, दावेदारों में सहमति न बनने से बढ़ी बेचैनी

राजस्थान कांग्रेस की जिलाध्यक्षों की सूची में प्रदेश की सबसे बड़ी संगठनात्मक इकाई जयपुर शहर का नाम शामिल न होने से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच हलचल तेज हो गई है। Pushpendra Bhardwaj और Sunil Sharma के बीच जारी खींचतान को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।

Jaipur News: सूत्रों के मुताबिक सांगानेर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे पुष्पेन्द्र भारद्वाज और वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा के नामों पर अंतिम दौर तक चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा है कि एक नाम लगभग फाइनल भी हो चुका था, लेकिन आखिरी समय में जयपुर शहर का नाम सूची से हटाया गया।

इस पूरे घटनाक्रम में मौजूदा अध्यक्ष आर.आर. तिवाड़ी की दावेदारी से मामला और जटिल हो गया है। स्थानीय संगठनात्मक संतुलन, आपसी सहमति का अभाव और राजनीतिक समीकरणों के चलते घोषणा टालने की आशंका जताई जा रही है।

इस बीच जारी सूची में

  • जयपुर ग्रामीण (पूर्व) से गोपाल मीणा
  • जयपुर ग्रामीण (पश्चिम) से विद्याधर चौधरी
    को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका है।

जयपुर कांग्रेस अध्यक्ष की दावेदारी में नए नामों की एंट्री

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत जयपुर शहर में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। केंद्रीय पर्यवेक्षक जीआर राजू ने रायशुमारी के बाद संकेत दिए थे कि निष्ठावान और मजबूत जनाधार वाले नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि हाल ही में दूसरे दलों से आए नेताओं को बाहर रखा जाएगा।

इस प्रक्रिया के तहत छह नामों का एक पैनल भी तैयार किया गया था। लेकिन जयपुर शहर का नाम रोके जाने के बाद अब
प्रतापसिंह खाचरियावास, रफीक खान और अमीन कागजी

जैसे नेताओं के नाम फिर चर्चा में आ गए हैं, हालांकि इन तीनों ने स्पष्ट तौर पर रुचि नहीं दिखाई है।

नाम फाइनल होने के बावजूद सूची से बाहर!

जयपुर शहर के जिलाध्यक्ष पद को लेकर सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया है। जिन नामों पर अंतिम सहमति बन चुकी थी, वे सूची में शामिल नहीं हो पाए, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा और दावेदारों में असमंजस की स्थिति बन गई है।

पूर्व जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि उनका नाम लगभग तय था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस बार पद लेने से इंकार कर दिया था। इसके बावजूद जयपुर शहर का नाम सूची से हटना उनके लिए भी चौंकाने वाला रहा।

विधायक रफीक खान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस बार दावेदारी नहीं की थी, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि पार्टी स्तर पर दो नामों पर गंभीर चर्चा चल रही थी। अंतिम समय में क्या बदलाव हुआ, इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है।

विधायक अमीन कागजी ने भी हैरानी जताते हुए कहा कि दो दावेदारों में से एक नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन बावजूद इसके जयपुर शहर को रोके रखना अप्रत्याशित फैसला है।

बढ़ती अटकलें और संगठन के सामने बड़ा सवाल

इन बयानों के बाद यह साफ होता जा रहा है कि मुकाबला अब पहली पंक्ति के नेताओं से हटकर दूसरी पंक्ति के दावेदारों की ओर बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व किन नए नामों पर विचार कर रहा है और किस राजनीतिक संतुलन के चलते फैसला टाला गया, यह फिलहाल पार्टी के भीतर सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

Leave a comment