राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पटना में हुए इस फैसले को संगठन मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
Patna: बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ तब सामने आया जब राष्ट्रीय जनता दल ने तेजस्वी यादव को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। पटना में हुई आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस फैसले को पार्टी के भविष्य और 2025-27 की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव लंबे समय से संगठन और विधानसभा में पार्टी का चेहरा रहे हैं, ऐसे में यह पद उनके राजनीतिक कद को औपचारिक रूप से मजबूत करता है।
पटना में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक
आरजेडी की यह अहम बैठक पटना के होटल मौर्या में आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, सभी प्रदेश इकाइयों के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए। कई राज्यों से आए प्रतिनिधि एक दिन पहले ही पटना पहुंच चुके थे। बैठक का मुख्य एजेंडा संगठनात्मक विस्तार, आगामी चुनावों की तैयारी और नेतृत्व को लेकर फैसला लेना था।
लालू यादव की सहमति से लगा अंतिम मोहर
तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सहमति निर्णायक रही। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राज्यसभा सांसद मीसा भारती तथा तेजस्वी यादव मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन को नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया।
तेजस्वी यादव की भूमिका में औपचारिक विस्तार
तेजस्वी यादव पहले ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी संगठनात्मक फैसलों में और बढ़ जाएगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे चुनावी रणनीति, कार्यकर्ताओं के समन्वय तथा प्रदेश इकाइयों के साथ संवाद मजबूत होगा। तेजस्वी यादव को युवा नेतृत्व के रूप में आरजेडी का चेहरा माना जाता है।
रोहिणी आचार्य की सोशल मीडिया प्रतिक्रिया
जहां एक तरफ आरजेडी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उत्साह दिखा, वहीं दूसरी तरफ लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर बिना नाम लिए तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। रोहिणी आचार्य ने इस फैसले को प्रतीकात्मक ताजपोशी बताते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
कठपुतली शहजादा वाली टिप्पणी
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि सियासत के शिखर पुरुष की गौरवशाली पारी का यह एक तरह से पटाक्षेप है। उन्होंने इसे ठकुरसुहाती करने वालों की जीत बताते हुए कठपुतली बने शहजादा की ताजपोशी करार दिया। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। पोस्ट में उन्होंने सीधे किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ तौर पर पार्टी नेतृत्व की ओर था।

पारिवारिक मतभेद फिर चर्चा में
बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद लालू परिवार के अंदर मतभेद खुलकर सामने आए थे। उस समय रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद से वह लगातार सक्रिय रही हैं और समय-समय पर पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला करती रही हैं।
पहले भी कर चुकी हैं कड़ी आलोचना
रोहिणी आचार्य ने इससे पहले भी एक पोस्ट में नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिम्मेदारी संभाल रहे व्यक्ति को सवालों से भागने के बजाय जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि तार्किक और तथ्यात्मक जवाब देने की जगह भ्रम फैलाया जा रहा है। इस बयान को आरजेडी के अंदरूनी विवाद का संकेत माना गया था।
RJD नेतृत्व की चुप्पी
रोहिणी आचार्य की ताजा टिप्पणी पर फिलहाल आरजेडी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन इस समय आंतरिक विवादों से ज्यादा आगामी चुनावों की तैयारी पर ध्यान देना चाहता है। नेतृत्व परिवर्तन को संगठनात्मक मजबूती की दिशा में कदम बताया जा रहा है।
बिहार की राजनीति में इसका असर
तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से बिहार की राजनीति में संदेश साफ गया है कि आरजेडी आने वाले वर्षों में युवा नेतृत्व पर भरोसा कर रही है। यह फैसला 2025 के विधानसभा चुनाव और 2027 की राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे तेजस्वी यादव का कद राज्य के बाहर भी बढ़ेगा।
संगठनात्मक मजबूती पर जोर
पार्टी नेताओं का कहना है कि इस बदलाव से आरजेडी की प्रदेश इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा। तेजस्वी यादव को जमीनी राजनीति का अनुभव है और वह युवाओं से सीधे जुड़ाव रखते हैं। पार्टी इसे सामाजिक न्याय की राजनीति को नए तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास मान रही है।
विरोधियों की नजर भी टिकी
आरजेडी में हुए इस बदलाव पर विपक्षी दलों की भी नजर है। भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे पारिवारिक राजनीति से जोड़ते हुए टिप्पणी की है। उनका कहना है कि यह फैसला संगठन से ज्यादा परिवार केंद्रित है। हालांकि आरजेडी समर्थक इसे नेतृत्व का स्वाभाविक विकास बता रहे हैं।










