शीतकालीन सत्र की शुरुआत में विपक्ष ने SIR पर तत्काल चर्चा की मांग तेज कर दी, जिससे सदन कई बार बाधित हुआ। सरकार अब इस मुद्दे पर किस नियम के तहत चर्चा कराई जा सकती है, इसका विकल्प तलाश रही है।
New Delhi: संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत होते ही विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) पर चर्चा की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस, TMC, SP और DMK सहित कई विपक्षी दल लगातार SIR को लेकर विरोध जता रहे हैं। मंगलवार को भी विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
विपक्ष क्यों कर रहा SIR पर चर्चा की मांग
देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया चला रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह मतदाता सूची को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया है और इस पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। विपक्षी दलों का कहना है कि SIR का असर सीधे चुनाव प्रक्रिया पर पड़ेगा, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सत्र की शुरुआत से पहले विपक्ष ने सरकार को साफ संदेश दिया था कि जब तक SIR पर चर्चा नहीं होगी, सदन सुचारू रूप से नहीं चल पाएगा। यही कारण है कि सत्र के दूसरे दिन भी भारी हंगामा देखने को मिला।
सरकार ने शुरू की समाधान की कोशिश
लगातार गतिरोध के बीच अब सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा का रास्ता तलाशा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकार यह विचार कर रही है कि यदि विपक्ष की मांग मानी जाती है, तो SIR पर चर्चा किस संसदीय नियम के तहत कराई जा सकती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि SIR चुनाव आयोग का स्वतंत्र फैसला है, इसलिए सीधे SIR पर चर्चा करवाना नियमों के अनुरूप मुश्किल हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विकल्प तलाशा जा रहा है कि संसद में “चुनाव सुधार (Electoral Reforms)” जैसे व्यापक विषय पर चर्चा करवाई जाए ताकि सांसद अपनी बात SIR के संदर्भ में भी रख सकें।
विपक्ष ने चर्चा की मांग नियम 267 के तहत की है। इस नियम के अनुसार सदन की सभी अन्य कार्यवाही रोककर तुरंत चर्चा कराई जाती है। लेकिन संसद में इस नियम के तहत चर्चा होने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।
सरकारी पक्ष मानता है कि नियम 267 का इस्तेमाल केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है। इसलिए यह रास्ता लगभग बंद है।











