डोनाल्ड ट्रंप की शांति पहल के तहत मॉस्को में हुई पांच घंटे की बैठक बिना परिणाम समाप्त हो गई। रूस और यूक्रेन के बीच डोनबास क्षेत्र पर गहरे मतभेद बरकरार रहे। पुतिन और ट्रंप के दूतों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
Russia-Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए शांति प्रयास एक बार फिर असफल हो गए हैं। ट्रंप ने अपने दूतों को मॉस्को भेजकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन पांच घंटे की लंबी बैठक के बाद भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। सबसे बड़ा अवरोध डोनबास क्षेत्र पर मतभेदों को माना जा रहा है, जिस पर रूस और यूक्रेन दोनों अपना दावा करते हैं।
क्रेमलिन में पांच घंटे की अहम बैठक
इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र रही क्रेमलिन में हुई वह बैठक, जिसमें पुतिन ने ट्रंप द्वारा भेजे गए दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की। बैठक का उद्देश्य युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा करना था। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि लगभग पांच घंटे तक लगातार चली।
रूसी अफसर यूरी उशाकोव ने बैठक को “उपयोगी, रचनात्मक और ठोस” बताया, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्ष अंतिम समझौते तक नहीं पहुँच सके। इससे साफ है कि बातचीत में गंभीर मुद्दों पर चर्चा तो हुई, लेकिन मतभेद अभी भी इतने गहरे हैं कि कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आ सका।
ट्रंप के दामाद की भूमिका

ट्रंप की टीम की ओर से भेजे गए चार प्रमुख प्रस्ताव इस बैठक का आधार थे। कुशनर और विटकॉफ ने इन प्रस्तावों को पुतिन के सामने विस्तृत रूप से रखा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन ने इनमें से कुछ बिंदुओं पर सहमति जताई और संकेत दिए कि रूस कुछ शर्तों पर आगे बढ़ने को तैयार है।
लेकिन कई अन्य मुद्दों पर पुतिन ने आपत्ति दर्ज की। विशेष रूप से सुरक्षा, भू-भाग और नियंत्रण क्षेत्रों से जुड़े बिंदुओं पर रूस का रुख पहले की तरह कठोर रहा। यही वजह है कि वार्ता सकारात्मक माहौल के बावजूद निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई।
डोनबास मुद्दे पर मूल असहमति
रूस और यूक्रेन के बीच समझौता न हो पाने की सबसे बड़ी वजह डोनबास क्षेत्र है। रूस का कहना है कि पूरा डोनबास उसका हिस्सा है, जबकि यूक्रेन अभी भी करीब 5,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए हुए है। दुनिया के अधिकांश देश भी डोनबास को यूक्रेन का हिस्सा मानते हैं।
रूस इस क्षेत्र को “क्षेत्रीय समस्या” का नाम देता है और इसे विवाद की जड़ बताता है। पुतिन ने बैठक में यही स्पष्ट किया कि जब तक डोनबास पर रूस की मांगें नहीं मानी जातीं, शांति समझौता संभव नहीं है।
बातचीत जारी रखने पर सहमति
हालांकि समझौता नहीं हो सका, लेकिन बैठक का एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है। ट्रंप की टीम और पुतिन के बीच बातचीत का एक नया प्रारूप तैयार हो सकता है।
उशाकोव ने स्वीकार किया कि “वाशिंगटन और मॉस्को दोनों जगह अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।” इसका मतलब है कि यह प्रयास समाप्त नहीं हुआ है बल्कि इसके अगले दौर की तैयारी की जा रही है, जहां दोनों पक्ष वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।











