वैल्यू फंड्स 2025 में निवेशकों को 8.6% रिटर्न दे पाए। विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में आय सुधार और सेक्टर रोटेशन के चलते सही वैल्यूएशन वाले फंड्स बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। लंबी अवधि और धैर्य से निवेशकों को लाभ मिलने की संभावना है।
Value Funds: पिछले एक साल में शेयर बाजार रेंज-बाउंड यानी सीमित दायरे में रहा, लेकिन वैल्यू फंड्स ने इस दौरान भी निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न दिए। 2025 में वैल्यू फंड्स ने औसतन 8.6 फीसदी रिटर्न दिया, जो लार्ज-कैप फंड्स के बाद दूसरे स्थान पर रहा। लार्ज-कैप फंड्स ने इस दौरान 9.7 फीसदी की औसत वृद्धि दर्ज की।
क्या हैं वैल्यू फंड्स
वैल्यू फंड्स उन कंपनियों में निवेश करते हैं जिनकी कीमतें बाजार में असलियत से कम दिख रही होती हैं। इन्हें उम्मीद होती है कि समय के साथ इन कंपनियों के शेयरों की कीमत वास्तविक मूल्य के अनुरूप बढ़ेगी। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पारुल महेश्वरी के अनुसार, “वैल्यू इन्वेस्टिंग का मूल विचार यह है कि बाजार अंततः इन शेयरों की असली कीमत को पहचान लेता है, जिससे निवेशकों को लाभ मिलता है।”
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, 30 नवंबर 2025 तक 25 वैल्यू फंड्स के पास कुल 2.17 लाख करोड़ रुपये की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) थी।
वैल्यू फंड्स का 2026 में आउटलुक
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में कंपनियों की आय में सुधार से शेयर बाजार के लिए अनुकूल माहौल बन सकता है। सही वैल्यूएशन पर निवेश करने वाले वैल्यू फंड्स इसका फायदा उठा सकते हैं। ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीनियर फंड मैनेजर धर्मेश कक्कड़ कहते हैं, “भले ही व्यापक सूचकांक हाई वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हों, लेकिन कई व्यक्तिगत शेयर कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे समय में अच्छी कंपनियों को सही कीमत पर खरीदने का मौका मिलता है।”
वैल्यू फंड्स का अच्छा प्रदर्शन तब होता है जब बाजार में लीडरशिप बदलती है और सेक्टर रोटेशन शुरू होता है। बड़ौदा बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड के सीनियर फंड मैनेजर जितेंद्र श्रीराम कहते हैं, “बाजार किसी थक चुके थीम से बाहर निकलता है और नए सेक्टर में निवेश बढ़ता है, तब वैल्यू फंड्स खास तौर पर लाभदायक होते हैं। टैक्स कटौती, GST में बदलाव और RBI की नीतिगत ढील से निवेशक उपभोग आधारित क्षेत्रों की ओर अधिक फोकस कर रहे हैं।”
वैल्यू इन्वेस्टिंग में धैर्य बेहद महत्वपूर्ण है। किसी शेयर की असली कीमत सामने आने में समय लग सकता है। कक्कड़ बताते हैं कि ऐसे समय भी आते हैं जब वैल्यू थीम से रिटर्न नहीं मिलता। पूरे बाजार चक्र के दौरान अलग-अलग निवेश शैलियों को लाभ मिलता है। मोमेंटम, ग्रोथ और क्वालिटी जैसी शैलियों को कुछ चरणों में बेहतर रिटर्न मिलता है, जबकि वैल्यू फंड्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।
फंड मैनेजर की भूमिका
एक्टिव रूप से मैनेज वैल्यू फंड्स में फंड मैनेजर की भूमिका अहम होती है। सही वैल्यू की पहचान करना, उसका सही आकलन करना और उचित कीमत पर निवेश करना नतीजों को तय करता है। जो निवेशक फंड मैनेजर से जुड़े जोखिम और लागत को कम करना चाहते हैं, वे अधिक AUM वाले और कम ट्रैकिंग एरर वाले वैल्यू इंडेक्स फंड्स में निवेश कर सकते हैं।
लंबी अवधि के लिए निवेश जरूरी
वैल्यू फंड्स उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जिनका निवेश लक्ष्य लंबी अवधि का हो। इन फंड्स में निवेश आदर्श रूप से सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए करना चाहिए। महेश्वरी कहती हैं, “जो निवेशक पांच साल से अधिक समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं, वे वैल्यू फंड्स में निवेश कर सकते हैं। ट्रेंड के पीछे चलने वाले और एक से तीन साल के निवेशक इस फंड से दूर रहें।”
कक्कड़ भी लंबे समय तक निवेश की सलाह देते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार अलग-अलग समय पर अलग-अलग निवेश शैलियों को इनाम देता है, इसलिए धैर्य रखना बेहद जरूरी है।
अपने रिस्क प्रोफाइल के अनुसार निवेश करें
वैल्यू फंड्स में निवेश का आवंटन निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर होना चाहिए। श्रीराम के अनुसार, “वैल्यू फंड्स पोर्टफोलियो के सहायक हिस्से होते हैं। आम निवेशकों के लिए 15 से 25 फीसदी का सहायक निवेश पर्याप्त है, जबकि HNIs इसके लिए पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा भी रख सकते हैं।” आक्रामक निवेशक बाजार में गिरावट के दौरान SIP के साथ-साथ एकमुश्त (lumpsum) निवेश भी कर सकते हैं।











