वीडियो गेम खेलते-खेलते बच्चा पहुंचा डिजिटल दुनिया में, रोमांचक कहानी

वीडियो गेम खेलते-खेलते बच्चा पहुंचा डिजिटल दुनिया में, रोमांचक कहानी
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रोहन एक 10 साल का लड़का था जिसे वीडियो गेम्स का बहुत नशा था। स्कूल से आते ही वह अपना बस्ता फेंकता और टीवी के सामने जम जाता। उसका पसंदीदा गेम था, 'जंगल क्वेस्ट'। यह एक ऐसा गेम था जिसमें घने जंगलों को पार करके खज़ाना ढूँढना होता था और राक्षसों से लड़ना होता था। रोहन इस गेम के आखिरी लेवल पर था और उसे जीतने का जुनून सवार था।

कहानी

शाम का समय था। बाहर बारिश हो रही थी और रोहन अपने कमरे में बैठा 'जंगल क्वेस्ट' खेल रहा था। उसकी माँ ने रसोई से आवाज़ लगाई, 'रोहन, टीवी बंद करो और होमवर्क कर लो।'

रोहन ने बिना नज़रें हटाए कहा, 'बस पाँच मिनट माँ! मैं फाइनल बॉस तक पहुँचने वाला हूँ।'

उसकी उंगलियाँ रिमोट कंट्रोलर पर तेज़ी से चल रही थीं। स्क्रीन पर उसका कैरेक्टर (खिलाड़ी) एक गहरी खाई को पार कर रहा था। तभी अचानक टीवी की स्क्रीन अजीब तरीके से झिलमिलाने लगी। स्क्रीन पर हरे और नीले रंग की बिजलियाँ सी कौंधने लगीं।

'अरे! यह क्या हो रहा है?' रोहन ने घबराकर कहा।

उसने रिमोट को हिलाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अचानक, टीवी स्क्रीन से एक तेज़ भंवर जैसा बना और उसने एक शक्तिशाली चुंबक की तरह रोहन को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया।

'बचाओ!' रोहन चिल्लाया, लेकिन उसकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी। एक झटके के साथ, वह टीवी स्क्रीन के अंदर खिंचा चला गया।

जब रोहन की आँखें खुलीं, तो उसने खुद को एक अजीब जगह पर पाया। वहाँ सब कुछ बहुत चमकदार और चौकोर था। पेड़-पौधे असली नहीं लग रहे थे, बल्कि वे छोटे-छोटे रंगीन डिब्बों से बने थे। आसमान का रंग अजीब सा बैंगनी था।

रोहन ने अपने हाथों को देखा। वे भी असली हाथ नहीं थे, बल्कि गेम के कैरेक्टर जैसे 'ब्लॉकी' हाथ थे।

'हे भगवान! मैं गेम के अंदर आ गया हूँ!' वह डर के मारे बड़बड़ाया।

तभी उसके सामने हवा में उड़ता हुआ एक छोटा सा रोबोट आया। 'स्वागत है खिलाड़ी नंबर एक!' रोबोट ने मशीनी आवाज़ में कहा। 'मेरा नाम 'पिक्सेल' है। तुम जंगल क्वेस्ट की डिजिटल दुनिया में फँस गए हो।'

रोहन ने घबराकर पूछा, 'मैं वापस अपने घर कैसे जाऊँगा, पिक्सेल?'

पिक्सेल ने बताया, 'वापस जाने का सिर्फ़ एक ही रास्ता है। तुम्हें इस गेम के फाइनल बॉस, 'पत्थर के राक्षस' को हराना होगा और 'एग्जिट पोर्टल' (बाहर जाने का दरवाज़ा) तक पहुँचना होगा। लेकिन सावधान रहना, यहाँ सब कुछ असली है। अगर तुम यहाँ गेम में आउट हुए, तो शायद हमेशा के लिए यहीं फँस जाओगे।'

रोहन के पास कोई विकल्प नहीं था। उसने हिम्मत जुटाई। पिक्सेल उसे रास्ता दिखाने लगा। रोहन को अब रिमोट से नहीं, बल्कि खुद दौड़ना और कूदना पड़ रहा था। उसने डिजिटल नदियों को पार किया, जहाँ मगरमच्छ मुँह खोले बैठे थे। उसने हवा में तैरते हुए प्लेटफार्मों पर छलांग लगाई। यह टीवी पर खेलने से कहीं ज़्यादा मुश्किल और थका देने वाला था।

आखिरकार, वे एक बड़ी गुफा के सामने पहुँचे। गुफा के अंदर से भयानक दहाड़ने की आवाज़ आई। 'ग्ररर्र्र!'

सामने 'पत्थर का राक्षस' खड़ा था। वह बहुत विशाल था और उसकी आँखें लाल अंगारों जैसी चमक रही थीं। राक्षस ने रोहन की तरफ एक बड़ा पत्थर फेंका। रोहन बाल-बाल बचा।

रोहन को याद आया कि गेम खेलते समय उसने एक 'पावर-अप' देखा था- एक जादुई हथौड़ा। उसने इधर-उधर देखा। उसे गुफा के कोने में वह चमकता हुआ हथौड़ा दिखाई दिया।

राक्षस उसकी तरफ बढ़ा। रोहन ने अपनी पूरी जान लगाकर दौड़ लगाई और हथौड़ा उठा लिया। जैसे ही राक्षस ने उस पर हमला किया, रोहन ने हवा में उछलकर जादुई हथौड़ा राक्षस के सिर पर दे मारा।

'धड़ाम!' एक ज़ोरदार आवाज़ हुई। राक्षस छोटे-छोटे डिजिटल टुकड़ों में बिखर गया और गायब हो गया।

राक्षस के गायब होते ही वहाँ एक सुनहरा दरवाज़ा प्रकट हुआ, जिस पर लिखा था, 'EXIT' (बाहर)।

पिक्सेल रोबोट ने कहा, 'शाबाश रोहन! तुमने कर दिखाया। अब जल्दी जाओ, दरवाज़ा बंद होने वाला है!'

रोहन ने पिक्सेल को धन्यवाद दिया और दौड़कर सुनहरे दरवाज़े में कूद गया।

एक तेज़ रोशनी हुई और अगले ही पल रोहन अपने कमरे के फर्श पर गिरा। उसके हाथ में रिमोट कंट्रोलर था और वह पसीने से तर-बतर था।

उसने सामने देखा। टीवी स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में लिखा था, 'CONGRATULATIONS! YOU WIN!' (बधाई हो! आप जीत गए!)।

तभी माँ कमरे में आईं। 'रोहन, अभी तक वहीं बैठे हो? चलो खाना खा लो।'

रोहन ने जल्दी से टीवी बंद कर दिया। उसने रिमोट को दूर रख दिया। उसने राहत की साँस ली।

'हाँ माँ, आ रहा हूँ,' रोहन ने कहा। 'अब मुझे बहुत तेज़ भूख लगी है।'

उस दिन के बाद से रोहन ने वीडियो गेम खेलना बंद नहीं किया, लेकिन उसने एक बात सीख ली थी। उसे समझ आ गया था कि स्क्रीन की वह चमकदार दुनिया चाहे कितनी भी रोमांचक हो, उसकी असली दुनिया, जहाँ उसका परिवार, दोस्त और असली खेल-कूद है, उससे कहीं ज़्यादा बेहतर और सुरक्षित है।

सीख 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'टेक्नोलॉजी और गेम्स मनोरंजन के लिए अच्छे हैं, लेकिन इनकी एक सीमा होनी चाहिए। हमें आभासी दुनिया (Virtual World) में इतना नहीं खोना चाहिए कि हम अपनी असली दुनिया की खुशियों और ज़िम्मेदारियों को भूल जाएँ।'

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