प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान क्रूर मुगल शासन के खिलाफ भारत के अदम्य साहस, शौर्य और वीरता की अनुपम मिसाल है।
नई दिल्ली: वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का त्याग और शौर्य भारत के इतिहास में अदम्य साहस, वीरता और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने Gen Z और Gen Alpha को लेकर भी अहम बयान दिया और इन पीढ़ियों पर देश को विकसित राष्ट्र बनाने का भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश आज उन वीर बालकों को स्मरण कर रहा है जिन्होंने बहुत कम उम्र में अत्याचार, अन्याय और धार्मिक कट्टरता के सामने झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने साहिबजादे बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के साहस को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया।
‘वीर साहिबजादों ने उम्र की सीमाओं को तोड़ दिया’ - पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा,
'वीर साहिबजादों ने उम्र और अवस्था की सभी सीमाओं को तोड़ दिया। वे क्रूर मुगल शासन के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे। उनका साहस इतना प्रचंड था कि मजहबी कट्टरता और आतंक की नींव तक हिल गई।” उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत और ऐसी प्रेरणादायक विरासत हो, वह हर चुनौती का सामना कर सकता है।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों की उम्र भले ही कम थी, लेकिन मुगल शासक औरंगजेब की क्रूरता के आगे उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
‘औरंगजेब भूल गया था कि हमारे गुरु साधारण नहीं थे’
पीएम मोदी ने कहा कि औरंगजेब यह मानता था कि साहिबजादों को निशाना बनाकर वह भारत की जनता के मनोबल को तोड़ देगा और उन्हें भयभीत कर धर्मांतरण के लिए मजबूर करेगा। लेकिन वह यह भूल गया था कि गुरु गोबिंद सिंह जी और उनका परिवार साधारण नहीं था। वे तप, त्याग और बलिदान के साक्षात प्रतीक थे। माता गुजरी जी सहित पूरे परिवार का साहस आज भी देशवासियों को शक्ति देता है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि चारों साहिबजादों का संघर्ष किसी सत्ता के लिए नहीं था, बल्कि यह भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच की लड़ाई थी। यह सत्य और असत्य, न्याय और अन्याय के बीच का संघर्ष था। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना अपने आप में अद्वितीय उदाहरण है।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि देश ने अब गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति पाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक औपनिवेशिक सोच के कारण भारत के नायकों और उनके बलिदानों को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 1835 में ब्रिटिश राजनेता थॉमस मैकाले द्वारा बोई गई मानसिकता के कारण भारतीय इतिहास के कई सत्य दबा दिए गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत ने यह तय कर लिया है कि वीरता, बलिदान और जन-नायकों की स्मृतियों को दबाया नहीं जाएगा और देश के नायकों को हाशिये पर नहीं रखा जाएगा। इसी संकल्प के तहत 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस पूरे उत्साह से मनाया जा रहा है।
Gen Z और Gen Alpha पर पीएम का भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि Gen Z (1997–2012) और Gen Alpha (2010–2025) की पीढ़ी ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी। उन्होंने कहा,
'मैं आपकी क्षमता देखता हूं, आपका आत्मविश्वास देखता हूं और मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आपकी पीढ़ी विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगी।'
उन्होंने यह भी बताया कि हर वर्ष देश के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है और इस वर्ष भी देशभर से 20 बच्चों को यह सम्मान प्रदान किया गया है।










