भारत की संसद का हालिया बजट सत्र राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप के कारण सुर्खियों में आ गया है। सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन तीखी नारेबाजी और विरोध के चलते कार्यवाही प्रभावित हुई। सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर संसद का कामकाज बाधित करने का आरोप लगा रहे हैं।
नई दिल्ली: संसद के Budget Session of the Parliament of India के दूसरे चरण का पहला दिन भारी हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ गया। हालांकि, जिस तरह से पक्ष और विपक्ष दोनों ने सदन के अंदर से लेकर बाहर तक अपने-अपने नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की, उससे साफ संकेत मिल गया कि अब राजनीतिक नैरेटिव वॉर शुरू हो चुकी है।
दरअसल, पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष संसद के भीतर महंगाई, बेरोजगारी और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। वहीं सरकार भी विपक्ष के इन हमलों का जवाब देते हुए पूरे घटनाक्रम को अपने सियासी फायदे में बदलने की कोशिश में जुटी हुई है।
संसद में हंगामे के बीच शुरू हुआ सत्र
Parliament of India के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। विपक्षी दलों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। सत्र के पहले दिन सदन में नारेबाजी और विरोध के कारण चर्चा सुचारु रूप से नहीं चल सकी। सरकार और विपक्ष दोनों ने संसद के भीतर और बाहर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत अलग-अलग संदेश देने की कोशिश की।
संसदीय अधिकारियों ने सदन में यह भी उल्लेख किया कि संसद की कार्यवाही पर भारी सार्वजनिक खर्च होता है। बताया गया कि संसद की कार्यवाही के हर मिनट पर लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से एक दिन की कार्यवाही पर लगभग 9 करोड़ रुपये का व्यय होता है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्षी दलों के लगातार विरोध के कारण जनता के पैसे का नुकसान हो रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।

सरकार ने विपक्ष पर लगाए आरोप
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल संसद में नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि विपक्ष मुद्दों को उठाने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए व्यवधान पैदा कर रहा है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने यह भी कहा कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार संसद में उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। कई विपक्षी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla पर आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले चरण में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया था।
विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस
बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष ने सरकार को विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर घेरने की कोशिश की थी। अब दूसरे चरण में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक कूटनीतिक घटनाओं पर चर्चा की मांग की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि भारत की विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक माहौल बनाना है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और संभावित व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने संसद में कई ऐसे मुद्दे उठाए जो पहले विपक्ष के नेता Rahul Gandhi उठाना चाहते थे। इन मुद्दों में राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े प्रश्न भी शामिल थे। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज किया।












