भारत-अमेरिका व्यापार तनाव और टैरिफ की आशंका से गुरुवार को शेयर बाजार में तेज बिकवाली रही। सेंसेक्स 780 अंक टूटा जबकि निफ्टी 26,000 के नीचे फिसल गया। यह करीब एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट रही।
Closing Bell Today: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त दबाव देखने को मिला। करीब एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बाजार बंद हुए। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर बाजार की चाल पर दिखा। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना से जुड़ी खबरों ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर कर दिया। नतीजा यह रहा कि बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा जब बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले साल 8 दिसंबर के बाद सबसे खराब सत्र माना जा रहा है। बीते चार कारोबारी दिनों में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक और निफ्टी लगभग 470 अंक टूट चुका है।
सेंसेक्स की चाल पूरे दिन दबाव में
30 शेयरों वाला BSE Sensex दिन की शुरुआत में ही कमजोरी के संकेत देने लगा। सेंसेक्स 100 से ज्यादा अंक गिरकर 84,778.02 पर खुला। खुलते ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया और पूरे दिन बाजार संभल नहीं पाया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 फीसदी की गिरावट के साथ 84,180.96 के स्तर पर बंद हुआ।
दिनभर के कारोबार में यह साफ दिखा कि निवेशक किसी भी जोखिम को लेने के मूड में नहीं थे। ज्यादातर हैवीवेट शेयरों में बिकवाली हावी रही, जिससे सेंसेक्स को संभालने का मौका नहीं मिला।
निफ्टी 26,000 के नीचे फिसला
NSE Nifty-50 की हालत भी सेंसेक्स से अलग नहीं रही। निफ्टी 26,106 के स्तर पर गिरावट के साथ खुला और कुछ ही समय में 26,000 के अहम स्तर के नीचे चला गया। बाजार बंद होने पर निफ्टी 263.9 अंक या 1.01 फीसदी टूटकर 25,876.85 पर बंद हुआ।
चुनिंदा शेयरों में ही तेजी
सेंसेक्स के शेयरों पर नजर डालें तो ज्यादातर दिग्गज कंपनियां गिरावट के साथ बंद हुईं। TCS, Tech Mahindra, L&T, Reliance Industries और Tata Steel जैसे बड़े शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
वहीं दूसरी तरफ Eternal, ICICI Bank, Bajaj Finance और BEL कुछ गिने-चुने शेयर रहे, जिनमें हल्की तेजी दर्ज की गई। हालांकि इन शेयरों की मजबूती भी बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए काफी नहीं रही।
मिडकैप स्मॉलकैप में भी भारी दबाव
गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। Broader Market में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। Nifty Midcap 100 में करीब 1.96 फीसदी और Nifty Smallcap 100 में लगभग 1.99 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
यह साफ संकेत है कि निवेशकों ने छोटे और मझोले शेयरों से भी पैसा निकालना शुरू कर दिया है। आमतौर पर जब बाजार में डर का माहौल बनता है, तो सबसे ज्यादा दबाव इन्हीं सेगमेंट्स पर देखने को मिलता है।
सेक्टोरल इंडेक्स पूरी तरह लाल
गुरुवार को सभी Sectoral Indices लाल निशान में बंद हुए। Nifty Metal Index सबसे ज्यादा टूटा और इसमें 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा Nifty Oil and Gas करीब 2.8 फीसदी, Nifty PSU Bank लगभग 2 फीसदी और Nifty IT करीब 1.99 फीसदी तक फिसल गया। सेक्टोरल स्तर पर इतनी व्यापक गिरावट यह दिखाती है कि बाजार में बिकवाली किसी एक वजह तक सीमित नहीं रही।
निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका
गिरते बाजार का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 4,72,11,739.12 करोड़ रुपये रह गया। एक ही कारोबारी दिन में निवेशकों के करीब 8.55 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
यह गिरावट निवेशकों के भरोसे को झटका देने वाली रही, खासकर उन लोगों के लिए जो हाल के रिकॉर्ड स्तरों पर बाजार में बने हुए थे।
एक्सपर्ट्स की राय क्या कहती है
Geojit Investments Limited के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ को लेकर दोबारा उभरी चिंताओं और FIIs की लगातार बिकवाली के चलते घरेलू बाजारों में गिरावट जारी रही। उन्होंने कहा कि मुनाफे में सुधार को लेकर जो सकारात्मक धारणा थी, उस पर इन वैश्विक कारणों का दबाव हावी हो गया।
उनके अनुसार, मेटल, ऑयल एंड गैस और आईटी शेयरों ने व्यापक बिकवाली का नेतृत्व किया। वैश्विक कीमतों में नरमी के बाद मुनाफावसूली के चलते मेटल शेयर टूटे, जबकि वेनेजुएला-अमेरिका तनाव की आशंका से ऑयल एंड गैस शेयरों में दबाव बना।
GDP अनुमान से मिली थोड़ी राहत
विनोद नायर ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के पहले अग्रिम GDP Estimate मजबूत आर्थिक वृद्धि की ओर इशारा करते हैं। मैन्युफैक्चरिंग में सुधार और सर्विस सेक्टर की मजबूती से यह संकेत मिलता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था में दम बना हुआ है।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि निकट अवधि में बाजार सतर्क रह सकता है और सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है। Q3 नतीजे और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।
Global Markets का मिला-जुला असर
ग्लोबल मार्केट्स की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में गिरावट के साथ बंद होने का असर एशिया पर भी पड़ा।
जापान का Nikkei 225 करीब 0.46 फीसदी चढ़ा। दक्षिण कोरिया का Kospi 0.12 फीसदी ऊपर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P ASX 200 करीब 0.21 फीसदी की बढ़त में दिखा। शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी शेयर फ्यूचर्स लगभग स्थिर रहे।
अमेरिका से मिले कमजोर संकेत
अमेरिकी बाजारों में बुधवार को कमजोरी देखने को मिली। S&P 500 और Dow Jones अपनी तीन दिन की तेजी की लड़ी तोड़ते हुए क्रमशः 0.3 फीसदी और 0.6 फीसदी नीचे बंद हुए। हालांकि Nasdaq Composite में टेक शेयरों के सहारे करीब 0.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
इस दौरान गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के शेयरों में 2.4 फीसदी की तेजी आई, जिससे नैस्डैक को सहारा मिला। कुछ समय के लिए अल्फाबेट ने मार्केट कैप के मामले में एप्पल को भी पीछे छोड़ दिया।
Q3 नतीजों पर रहेगी नजर
आज वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे कई कंपनियां जारी करने वाली हैं। इनमें Elecon Engineering Company, Transformers and Rectifiers India, EMCO Elecon India, Uranus Infrastructure और Toyam Sports शामिल हैं।
IPO सेगमेंट की स्थिति
प्राइमरी मार्केट में मेनबोर्ड सेगमेंट में फिलहाल कोई गतिविधि नहीं है। हालांकि SME Segment में Diferral Technologies का आईपीओ आज खुल रहा है। Victory Electric Vehicles International और Yajur Fibers के आईपीओ का दूसरा दिन है, जबकि Gabion Technologies India के आईपीओ में आज निवेश का आखिरी मौका है।











