राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति 2021–22 मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि जांच में ठोस सबूत नहीं मिले।
New Delhi: दिल्ली आबकारी नीति मामले में 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य सभी आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। यह मामला दिल्ली की 2021–22 आबकारी नीति यानी शराब नीति से जुड़ा था।
नई दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को इस नई नीति को लागू किया था। इसका उद्देश्य था कि शराब की खुदरा बिक्री में निजीकरण लाया जाए, प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जाए और सरकारी राजस्व को बढ़ाया जाए। नीति के लागू होने से पहले दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों और निजी कंपनियों के बीच समान रूप से बंटती थी। इस समय आबकारी विभाग लगभग 4,500 करोड़ रुपये का राजस्व कमाता था।
नई आबकारी नीति 2021-22 के तहत सरकार ने शराब की दुकानों को पूरी तरह निजी करने का रास्ता अपनाया और इसका लक्ष्य 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना था। इसके तहत शहर के 272 नगरपालिका वार्डों में कम से कम दो शराब की दुकानें सुनिश्चित की गईं।
आरोप और जांच की शुरुआत
सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया कि नई आबकारी नीति को लागू करते समय कई अनियमितताएं हुईं। आरोप था कि कुछ लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ दिया गया, लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया और एल-1 लाइसेंस बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बढ़ा दिए गए। इसके साथ ही आरोप था कि कुछ लाभार्थियों ने अधिकारियों को अवैध लाभ दिया और अपने खातों में गलत प्रविष्टियां कीं।
साथ ही, यह भी आरोप था कि आबकारी विभाग ने नियमों के विरुद्ध एक सफल निविदाकर्ता को लगभग 30 करोड़ रुपये की बयाना जमा राशि वापस कर दी। कोरोना महामारी के कारण 28 दिसंबर 2021 से 27 जनवरी 2022 तक निविदा लाइसेंस शुल्क में छूट दी गई, जिससे सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच कब और कैसे शुरू हुई

8 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव ने रिपोर्ट दी कि नई आबकारी नीति में गंभीर अनियमितताएं हुईं और सरकार को नुकसान हुआ। इसके बाद 22 जुलाई 2022 को उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने CBI से जांच की सिफारिश की।
31 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नीति को रद्द कर पुरानी नीति लागू की। 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप में FIR दर्ज की। आरोप लगाया गया कि नीति से दक्षिण भारत के कुछ निजी व्यापारियों को अनुचित लाभ मिला और इसके बदले आम आदमी पार्टी के नेताओं को लगभग 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली।
2023 में, मनीष सिसोदिया को पहले सीबीआई ने और बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। 2024 में, अरविंद केजरीवाल को भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को लोकसभा चुनाव प्रचार और CBI जांच के दौरान अंतरिम जमानत दी।
इस मामले में कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। CBI ने उनके आवासों और कार्यालयों पर छापेमारी की। गाजियाबाद में सिसोदिया के बैंक लॉकर की तलाशी ली गई। मीडिया प्रभारी और कारोबारी भी इस जांच में शामिल हुए।
कोर्ट का फैसला
27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। अदालत ने कहा कि CBI ने ठोस सबूत या आपराधिक साजिश साबित नहीं की। केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किया और कहा कि मामला आगे नहीं बढ़ेगा। अदालत ने CBI को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि चार्जशीट और दस्तावेजों में कई विसंगतियां थीं।












