Indresh Upadhyay विवाद: कथावाचक ने माफी मांगते हुए वीडियो में दी सफाई

Indresh Upadhyay विवाद: कथावाचक ने माफी मांगते हुए वीडियो में दी सफाई

प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने यादव समाज से विवादित बयान पर सार्वजनिक माफी मांगी है। उन्होंने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। विवाद लगभग 4-5 साल पुरानी कथा से जुड़ा था और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक नाराजगी फैली थी।

इंद्रेश उपाध्याय माफी यादव समाज: प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश, विशेषकर मथुरा में यादव समाज को दिए गए विवादित बयान पर सार्वजनिक माफी मांगी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी भावुक वीडियो में स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। यह विवाद लगभग 4-5 साल पुरानी कथा से जुड़ा था, जो हाल ही में वायरल हुई और जिसके बाद समाज के विभिन्न संगठनों ने प्रतिक्रिया दी। उपाध्याय ने कहा कि उनका सम्मान हमेशा यादव समाज के प्रति रहा है और वे हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं।

इंद्रेश उपाध्याय ने यादव समाज से मांगी माफी

प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने यादव समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। उपाध्याय ने कहा कि उनका विवादित बयान करीब 4-5 साल पुरानी कथा से जुड़ा है और यदि उनके शब्दों से यादव समाज को चोट लगी है, तो वे हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं।

विवादित बयान और सोशल मीडिया का असर

इंद्रेश उपाध्याय का कथित विवादित बयान यदुवंश और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े संबंध को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो के वायरल होने के बाद मथुरा और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में यादव समाज में गहरी नाराजगी देखने को मिली। समाज के विभिन्न संगठनों और प्रबुद्धजनों ने इस बयान को शास्त्रों और इतिहास के साथ खिलवाड़ करार दिया और चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक माफी नहीं दी गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उपाध्याय की सफाई और भावुक अपील

वीडियो संदेश में इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि उनके मन में यादव समाज के प्रति हमेशा सम्मान रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के सभी यादव उनके अपने हैं और हम सब एक ही संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी हैं। उपाध्याय ने यह भी उल्लेख किया कि कई बार अराजक तत्व पुरानी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं ताकि समाज में भेदभाव और विरोध पैदा हो।

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