क्या बच्चों को निकनेम से बुलाना नुकसानदायक हो सकता है? जाने एक्सपर्ट्स की राय

क्या बच्चों को निकनेम से बुलाना नुकसानदायक हो सकता है? जाने एक्सपर्ट्स की राय

ज्योतिषाचार्य डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार किसी व्यक्ति को पूरे नाम से पुकारना उसकी सकारात्मक ऊर्जा और प्रगति से जुड़ा होता है। उपनाम या अधूरा नाम व्यक्ति के “नामबल” को कमजोर कर सकता है। इस आदत का असर आत्मविश्वास और जीवन की दिशा पर भी पड़ सकता है।

नामबल और सकारात्मक ऊर्जा: प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. बसवराज गुरुजी ने बताया कि किसी व्यक्ति को उसके पूरे नाम से पुकारना उसके जीवन पर सीधा असर डालता है। यह जानकारी उनके व्यक्तिगत विचारों और अध्ययनों पर आधारित है, जिसमें नाम की ऊर्जा को जीवन की प्रगति से जोड़ा गया है। उनका कहना है कि बच्चों, परिवार के सदस्यों और अपनों को बचपन से पूरे नाम से बुलाने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि यही नाम व्यक्ति की पहचान, आत्मबल और सकारात्मक सोच को मजबूती देता है।

हर नाम के पीछे छिपी होती है एक शक्ति

डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का नाम सोच-समझकर और अच्छे भाव से रखा जाता है। कई बार नाम किसी देवता, कुलदेवता, पूर्वज, प्रकृति या किसी सकारात्मक गुण से जुड़ा होता है। जैसे रामकृष्ण, शिवकुमार, श्रीनिवास या बालकृष्ण जैसे नाम केवल पहचान नहीं होते, बल्कि अपने भीतर एक भाव, ऊर्जा और उद्देश्य भी समेटे होते हैं।

लेकिन हमारे समाज में आम चलन है कि हम इन लंबे और अर्थपूर्ण नामों को छोटा करके बोलने लगते हैं। रामकृष्ण को राम, श्रीनिवास को सीनू, मंजुला को मंजू और बालकृष्ण को बाल कहकर पुकारा जाता है। गुरुजी के अनुसार, जब हम किसी के नाम को अधूरा कर देते हैं, तो उस नाम से जुड़ी पूरी सकारात्मक शक्ति भी व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाती। उनका कहना है कि इससे व्यक्ति की प्रगति रुक सकती है और नकारात्मक प्रभाव उसे घेर सकते हैं।

क्या होता है नामबल और इसका जीवन से क्या संबंध?

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि हर नाम का अपना एक विशेष कंपन और ऊर्जा होती है। इसे ही “नामबल” कहा जाता है। जब किसी व्यक्ति को उसके पूरे नाम से पुकारा जाता है, तो उस नाम से जुड़ी सारी सकारात्मकता, गुण और ऊर्जा उस व्यक्ति में स्थानांतरित होती है। यह प्रक्रिया वैसी ही मानी जाती है जैसे सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें नई ऊर्जा देती हैं।

गुरुजी उदाहरण देते हैं कि जब हम किसी देवता का नाम लेते हैं, तो उसके दिव्य गुण हमारे भीतर जागृत होते हैं। उसी तरह जब किसी बड़े-बुजुर्ग या किसी महान व्यक्ति का नाम लिया जाता है, तो उसके संस्कार और गुण भी अनजाने में हमें प्रभावित करते हैं। ठीक इसी सिद्धांत के आधार पर व्यक्ति का पूरा नाम भी उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। नामबल व्यक्ति के आत्मविश्वास, सोच, व्यवहार और कुल मिलाकर उसके जीवन के हर पहलू पर असर डालने में मदद करता है।

बचपन से डालें पूरे नाम से पुकारने की आदत

डॉ. बसवराज गुरुजी का मानना है कि किसी को उसके जीवन के अंतिम पड़ाव पर पूरे नाम से पुकारना उतना प्रभावी नहीं होता, जितना कि बचपन से ही यह आदत डालना। बच्चों में शुरू से ही अपने पूरे नाम को सुनने और समझने की आदत विकसित होनी चाहिए, ताकि वे अपने नाम से जुड़ी ऊर्जा और पहचान को महसूस कर सकें।

उन्होंने कहा कि जैसे ईश्वर के बारे में कहा जाता है कि “नाम में ही शक्ति होती है”, उसी तरह हर व्यक्ति के नाम के साथ भी एक विशेष शक्ति जुड़ी होती है। यह शक्ति हर जीव में विद्यमान होती है, बस उसे सही तरीके से जागृत करने की जरूरत होती है। किसी को उसके पूरे नाम से पुकारना इस दिशा में एक सरल लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है।

छोटी आदत, लेकिन असर गहरा

गुरुजी का यह भी कहना है कि उपनाम से बुलाना भले ही हमें प्यार भरा और harmless लगे, लेकिन इसके प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं। नाम सिर्फ पुकारने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की पहचान, आत्मबल और जीवन की दिशा को भी प्रभावित करता है। इसलिए हमें अपनी इस छोटी-सी आदत पर दोबारा सोचने की जरूरत है।

उन्होंने सभी लोगों को सलाह दी है कि वे अपने परिवार के सदस्यों, बच्चों और प्रियजनों को पूरे नाम से बुलाने की आदत अपनाएं। यह न सिर्फ व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता को बढ़ावा देता है, बल्कि उसके आत्मविश्वास और प्रगति को भी मजबूती देता है।

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