मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज, इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर कंपाउंड को बनाया निशाना

मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज, इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर कंपाउंड को बनाया निशाना

मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज, इजरायल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला किया। ईरान ने खाड़ी में जवाबी कार्रवाई की और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित, कच्चे तेल की कीमत $200 प्रति बैरल तक बढ़ने का खतरा।

Iran-US War: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष तेजी से गंभीर संकट में बदल गया है। 28 फरवरी से चल रहे इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान में कई जगहों पर हवाई हमले किए। गुरुवार को इजरायल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला किया, जिससे तेहरान में जोरदार धमाके हुए। शहर के पश्चिमी हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया और नागरिकों में डर का माहौल बन गया।

ईरान की कड़ी चेतावनी

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजरायल फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर हमला करता है, तो ईरान कोई संयम नहीं रखेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर ईरानी द्वीपों की जमीन पर हमला हुआ तो ईरान सभी सीमाएं तोड़ देगा और खाड़ी लाल हो जाएगी। 

हालांकि, उन्होंने किसी विशेष द्वीप का नाम नहीं लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी अधिकारी खर्ग द्वीप पर नियंत्रण के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जो ईरान के लिए तेल निर्यात में अहम स्थान रखता है।

खाड़ी में जहाज पर हमला

ईरानी सेना ने फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक जहाज को निशाना बनाया। यह जहाज मार्शल द्वीपसमूह के झंडे वाला था, लेकिन ईरान का दावा है कि यह अमेरिकी स्वामित्व वाला था। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने पोर्टल सेपाह न्यूज पर कहा कि सेफसी नामक यह जहाज अमेरिकी सेना की संपत्ति था और चेतावनी के बावजूद इसे निशाना बनाया गया। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो पाई है।

इराक में इतालवी सैन्य ठिकाने पर हमला

इसी बीच इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एरबिल के पास इतालवी सैन्य ठिकाने पर भी हमला हुआ। अधिकारियों ने बताया कि हमले से कुछ नुकसान हुआ, लेकिन किसी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। यह हमला कैंप सिंगारा पर हुआ, जहां अमेरिका समेत कई देशों के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इस हमले की कड़ी निंदा की। 

कैंप के कमांडर स्टेफानो पिजोटी के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं कि हमला ड्रोन से किया गया या मिसाइल से, लेकिन कुछ इमारतों और उपकरणों को नुकसान पहुंचा है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर

इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार खाड़ी देशों ने तेल उत्पादन में भारी कटौती की है, जिससे आपूर्ति में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। 

युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया में तेल परिवहन का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, और इसके नियंत्रण से वैश्विक तेल आपूर्ति और भी कम हो गई है।

तेल की आपूर्ति में कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे ना सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी, बल्कि भारत जैसे आयातक देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि संभव है।

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