पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद का उद्घाटन करने की योजना को लेकर सियासी पारा बढ़ गया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद के उद्घाटन की योजना ने राज्य में सियासी पारा गर्म कर दिया है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व टीएमसी के बागी विधायक हुमायूं कबीर की ओर से किया जा रहा है। हाल ही में बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस मसले पर राज्य सरकार को चिट्ठी लिखकर अपनी चिंता जताई और साफ कर दिया कि इस तरह के आयोजन को किसी भी हाल में अनुमति नहीं दी जाएगी।
राज्यपाल सीवी आनंद बोस का बड़ा बयान
राज्यपाल बोस ने कहा,
'मुझे जो इंटेलिजेंस और फील्ड से रिपोर्ट मिली है, वो बताती है कि मुर्शिदाबाद को ‘स्कैंडल के स्कूल’ में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काई गईं, तो संविधान और राज्य केवल दर्शक नहीं बने रहेंगे। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसी इमारत के निर्माण की बात करने वाले लोगों को यह चेतावनी गंभीरता से लेनी चाहिए। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा रोकने के लिए प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रहने का निर्देश दिया।

बंगाल की बदलती डेमोग्राफी पर चिंता
राज्यपाल ने मुर्शिदाबाद और राज्य की बदलती डेमोग्राफी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, डेमोग्राफिक असंतुलन का डेटा मौजूद है और यह अपने आप में सब कुछ बयान करता है। सर्वे से यह साबित होगा। बंगाल के लिए हिंसा और भ्रष्टाचार दो बड़े कैंसर हैं, जिन्हें जड़ से खत्म करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान राज्यपाल की उन रिपोर्ट्स और फील्ड इंटेलिजेंस पर आधारित है, जिनमें संभावित सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
बागी टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी इमारत का उद्घाटन करने का ऐलान किया है। इस तारीख का चुनाव राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी। टीएमसी इस दिन को ‘संघर्ष दिवस’ के रूप में मनाती है और इस वर्ष राज्य सरकार ने भी इस दिन को अवकाश घोषित किया है।
कबीर ने अपने बयानों में चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन या राज्य सरकार उन्हें रोकने की कोशिश करेगा, तो उनका व्यापक प्रतिरोध होगा। उन्होंने कहा कि उनका कार्यक्रम संवैधानिक अधिकारों के तहत होगा और इसमें लाखों लोग शामिल हो सकते हैं।
हुमायूं कबीर और राज्यपाल का टकराव
हुमायूं कबीर ने राज्यपाल द्वारा लिखे पत्र को निराधार और राजनीति से प्रभावित बताते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी लेती है, और राज्यपाल केवल सलाहकार हैं। कबीर ने कहा, “राजभवन का डर निरर्थक है और उनकी सलाह अनावश्यक है। हालांकि, मुर्शिदाबाद प्रशासन ने अभी तक हुमायूं कबीर को कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है। जिला अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
कबीर ने इसके जवाब में चेतावनी जारी की: अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो रेजिनगर से बेहरामपुर तक का राजमार्ग अवरुद्ध कर दिया जाएगा। मेरा संदेश साफ है- आग से मत खेलो।
राज्य में यह विवाद टीएमसी, विपक्षी दलों और प्रशासन के बीच सियासी टकराव का रूप ले रहा है। हुमायूं कबीर का लगातार विरोध और धमकी भरे बयान राज्य में कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। वहीं राज्यपाल बोस ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रावधानों और कानून का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।













