उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने लखनऊ और कानपुर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए गंगा नदी पर दो नए पुल बनाने की मंजूरी दी है। इस परियोजना से दूरी 14 किलोमीटर से घटकर करीब 4 किलोमीटर रह जाएगी और ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और शहरी विकास पर पड़ने वाला है। सबसे अहम निर्णय लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को आसान बनाने के लिए नए ब्रिज निर्माण को मंजूरी देना रहा।
सरकार ने सरसैया घाट से शुक्लागंज (उन्नाव) के बीच गंगा नदी पर दो नए पुल बनाने की योजना को स्वीकृति दी है। इन पुलों के बनने से लखनऊ और कानपुर के बीच आवाजाही पहले से ज्यादा तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। लंबे समय से इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी की समस्या बनी हुई थी, जिसे दूर करने के लिए यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है।
दो नए ब्रिज का होगा निर्माण
कैबिनेट ने सरसैया घाट से शुक्लागंज के बीच लगभग 4200 मीटर लंबाई के दो-दो लेन वाले दो अलग ब्रिज बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 753.13 करोड़ रुपये है। फिलहाल निर्माण कार्य के लिए 460 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इस प्रोजेक्ट की निगरानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEDA) द्वारा की जाएगी। वहीं पुलों के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पुल निगम को सौंपी गई है। सरकार ने इस परियोजना को 36 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
सरकार का मानना है कि इन पुलों के बनने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों को यात्रा में काफी राहत मिलेगी।
दूरी घटकर 14 किलोमीटर से 4 किलोमीटर रह जाएगी
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा दूरी और समय की बचत के रूप में सामने आएगा। अभी कानपुर नगर की वीवीआईपी रोड से ट्रांसगंगा सिटी तक पहुंचने के लिए करीब 14 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। नए ब्रिज बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 4 किलोमीटर रह जाएगी। इसका मतलब है कि लोगों का समय बचेगा और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
अभी गंगा बैराज पर अक्सर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है। इस कारण रोजाना हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नए पुल बनने के बाद इस जाम से भी काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखकर बदली गई योजना
शुरुआत में इस जगह पर चार लेन का एक ही पुल बनाने की योजना थी। लेकिन बाद में यह महसूस किया गया कि जहां पुल शहर में उतरता है वहां भारी ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है। इसी वजह से योजना में बदलाव करते हुए दो-दो लेन के दो अलग पुल बनाने का फैसला लिया गया। इससे ट्रैफिक का दबाव बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

इन पुलों को रानीघाट और घोवीघाट के पास जोड़ा जाएगा। इससे जाजमऊ पुल पर पड़ने वाला ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। भविष्य में इन पुलों को गंगा रिवर फ्रंट से जोड़ने की भी योजना है, जिससे शहर की कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकेगी।
मेरठ में बनेगा इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन क्लस्टर
कैबिनेट बैठक में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे Integrated Construction and Logistics Cluster (IMLC) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह क्लस्टर करीब 200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके निर्माण पर लगभग 213.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह परियोजना अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत विकसित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस क्लस्टर का निर्माण 18 महीने के भीतर पूरा कर लिया जाए। इस क्लस्टर के बनने से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
निवेश बढ़ाने के लिए कंपनियों को सब्सिडी
कैबिनेट ने राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए तीन कंपनियों को कुल 82.65 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह सब्सिडी विदेशी निवेश और तुरंत निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत दी जा रही है।
इस योजना के तहत TI मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड को मेडिकल डिवाइस पार्क में निवेश के लिए 14.77 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं विजन सोर्स LLP को 65.35 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर की गई है। इसके अलावा यूनिलीवर इंडिया लिमिटेड को जीएसटी के रूप में 2.53 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देने का फैसला किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की नीतियों से राज्य में निवेश बढ़ेगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
उपभोक्ता संरक्षण परिषद के गठन को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य और जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद (प्रथम संशोधन) नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी है। नए नियमों के अनुसार जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद में गैर-सरकारी सदस्यों का नामांकन अब जिला अधिकारी यानी DM द्वारा किया जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिषद के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे उपभोक्ता से जुड़े मामलों के समाधान में तेजी आएगी और लोगों को न्याय पाने में आसानी होगी।
निकायों और प्राधिकरणों को मिलेगी बड़ी आर्थिक मदद
कैबिनेट ने शहरी विकास से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने शहरी निकायों और विकास प्राधिकरणों को मिलने वाली दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क की सब्सिडी को अब तिमाही के बजाय किस्तों में जारी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद नगर निगमों, नगर पालिकाओं और विकास प्राधिकरणों को 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जल्द उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार का कहना है कि इससे शहरों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को तेजी मिलेगी। सड़कों, जल आपूर्ति, सीवर और अन्य शहरी परियोजनाओं पर काम तेज हो सकेगा।









