ओडिशा में राज्यसभा चुनाव की चौथी सीट पर सियासी पारा चढ़ गया। BJD-कांग्रेस ने साझा उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता घोषित किया, जबकि BJP की रणनीति और विधायक वोटों का गणित अब निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
Odisha Politics: ओडिशा में आगामी राज्यसभा चुनावों में चार सीटों में से चौथी सीट अब सबसे अहम बनकर उभरी है। इस सीट पर मुकाबला केवल संख्या का नहीं बल्कि सियासी रणनीति और गठबंधनों का भी खेल है। बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने साझा उम्मीदवार के रूप में डॉ. दत्तेश्वर होता का नाम घोषित कर नई सियासी जुगलबंदी दिखाई है। इसके बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ गई है।
राज्यसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो BJP की दो सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, जबकि BJD की एक सीट पक्की मानी जा रही है। ऐसे में चौथी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है, क्योंकि यह ओडिशा में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।
साझा उम्मीदवार से बढ़ी सियासी हलचल
BJD ने चौथी सीट के लिए डॉ. दत्तेश्वर होता को साझा उम्मीदवार घोषित किया, जिसके तुरंत बाद कांग्रेस ने भी उनका समर्थन करने की घोषणा कर दी। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि यह फैसला आपसी संबंध सुधारने और राजनीतिक तालमेल बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम है।
पूर्व मुख्यमंत्री और BJD नेता नवीन पटनायक ने सभी दलों से अपील की कि वे डॉ. होता को समर्थन दें और उन्हें राज्यसभा भेजें। उन्होंने कहा कि साझा उम्मीदवार को समर्थन देने से ओडिशा की राजनीतिक स्थिरता और सहयोग की भावना मजबूत होगी।
भाजपा की रणनीति पर सियासी नजर

साझा उम्मीदवार की घोषणा के बाद अब सभी की नजर BJP की रणनीति पर टिक गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या BJP भी चौथी सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी या फिर किसी बड़े और प्रभावशाली चेहरे को मैदान में उतारकर सियासी दांव-पेंच खेलेगी।
ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा कि पार्टी ने संसदीय समिति को सभी जानकारी भेज दी है और अब समिति के फैसले का इंतजार है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर BJP तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप भी सामने आ सकते हैं।
वोटों का गणित
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 30 वोट जरूरी हैं। BJD के पास अपनी सुनिश्चित सीट के अलावा 18 वोट बचते हैं। कांग्रेस और एक सीपीआई विधायक के समर्थन से कुल 15 वोट बनते हैं। इस तरह डॉ. होता के समर्थन में कुल 33 वोट बनते हैं, जो उन्हें मजबूत स्थिति में ले जाते हैं।
वहीं BJP के पास 82 विधायक हैं, लेकिन चौथी सीट जीतने के लिए उन्हें कम से कम आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इसके अलावा निलंबित BJD विधायक अरविंद महापात्र और सनातन महाकुड का समर्थन मिलने पर भी पार्टी को छह और वोट जुटाने होंगे। इस गणित के कारण चौथी सीट पर सियासी रणनीति और गठबंधन निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
संभावित हॉर्स ट्रेडिंग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर BJP अपना तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग जैसी रणनीतियों की संभावना बढ़ जाएगी। ऐसे में चौथी सीट केवल संख्या का खेल नहीं रह जाएगी बल्कि यह राजनीतिक चालाकी, गठबंधनों और व्यक्तिगत समर्थन की भी परीक्षा बनेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सीट BJD और कांग्रेस के बीच बढ़ते तालमेल को परखने का अवसर भी है। अगर साझा उम्मीदवार जीतते हैं तो यह दोनों दलों के बीच स्थायी सहयोग की दिशा में पहला मजबूत संकेत माना जाएगा। वहीं BJP की हार या जीत भी पार्टी की ओडिशा में राजनीतिक स्थिति को तय करेगी।











