पश्चिम बंगाल में SIR विवाद को लेकर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रक्रिया को अमानवीय बताते हुए आम लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया है और जरूरत पड़ने पर खुद पैरवी करने की बात कही है।
West Bengal: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी और कानूनी टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि SIR प्रक्रिया के कारण आम लोगों को परेशान किया जा रहा है और अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद सुप्रीम कोर्ट में केस की पैरवी करने की अनुमति मांगेंगी।
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है और चुनाव आयोग के साथ सरकार का टकराव खुलकर सामने आ चुका है।
दक्षिण 24 परगना में ममता बनर्जी का बड़ा बयान
सोमवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने SIR को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले में कानूनी सलाह ले रही है और अदालतों के खुलते ही इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के कारण बहुत से लोग मानसिक तनाव में हैं। कई लोग बीमार पड़े हैं और कुछ की मौत तक हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन इसका असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में खुद पैरवी करने का संकेत
ममता बनर्जी ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद एक प्रशिक्षित वकील हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सुप्रीम कोर्ट में खुद पैरवी करने की अनुमति मांगेंगी।
उन्होंने कहा कि यदि अदालत अनुमति देती है तो वह एक आम नागरिक के रूप में इस प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाएंगी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि याचिका वह व्यक्तिगत रूप से दायर करेंगी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर की जाएगी।
SIR प्रक्रिया को बताया अमानवीय
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को अमानवीय करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत लोगों को डराया जा रहा है और प्रशासनिक मनमानी की जा रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि बिना किसी ठोस और वैध कारण के मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। इससे चुनाव से पहले एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया भय और उत्पीड़न का जरिया बन गई है।

बुजुर्गों और बीमार लोगों को बताया जा रहा परेशान
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों और बुजुर्ग नागरिकों को अपनी पहचान साबित करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही लोकतंत्र है। ममता बनर्जी ने कहा कि अगर किसी बीजेपी नेता के बुजुर्ग माता-पिता को पहचान साबित करने के लिए घंटों लाइन में खड़ा किया जाए तो उन्हें कैसा लगेगा।
डर और तनाव से मौतों का दावा
ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया से जुड़े डर और तनाव के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन मौतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती और इसी वजह से अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया गया है।
चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनाव से पहले मतदाता सूची में मनमाने बदलाव के लिए किया जा रहा है।
उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ खास वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा
ममता बनर्जी ने इस मौके पर बीजेपी शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे भेदभाव का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषा बोलने वाले लोगों को जानबूझकर संदेह के घेरे में रखा जा रहा है और उन्हें अवैध मतदाता या बाहरी बताने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह न सिर्फ लोकतंत्र के खिलाफ है बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है।
TMC का आरोप, लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि SIR के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि आम नागरिकों को डराकर और परेशान करके उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है। TMC नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो इसका असर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर पड़ेगा।











