दिल्ली के बाद अब राजस्थान में भी हवा ज़हरीली होती जा रही है। जयपुर सहित 12 से अधिक शहरों में रविवार को एक्यूआई 200 के पार पहुंच गया। भिवाड़ी, कोटा और सीतापुरा का स्तर 300 से ऊपर जाकर खतरनाक श्रेणी में दर्ज हुआ।
Jaipur: राजस्थान में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और रविवार को जयपुर, भिवाड़ी, कोटा सहित 12 से अधिक शहरों की एयर क्वालिटी गंभीर स्तर पर दर्ज की गई। भिवाड़ी और कोटा का एक्यूआई 300 पार कर गया, जबकि राजधानी जयपुर के सीतापुरा क्षेत्र में यह 307 तक पहुंचा, जो बेहद खतरनाक श्रेणी मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति और बढ़ते वाहनों का धुआं प्रदूषण में प्रमुख योगदान दे रहा है। राज्य सरकार मॉनिटरिंग बढ़ाने और नियंत्रण उपायों पर काम कर रही है,देखें कहीं इसमें आपके शहर का नाम तो नहीं।
जयपुर में लगातार तीसरे दिन हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में
जयपुर में तीसरे दिन भी वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर बना रहा। शहर के सीतापुरा क्षेत्र में एक्यूआइ 307 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक श्रेणी माना जाता है। जमीन की सतह के नजदीक प्रदूषक कणों की अधिक मात्रा के कारण पूरे दिन स्मॉग छाया रहा और दृश्यता पर भी असर पड़ा। हालांकि शाम होते ही हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण में हल्की गिरावट देखी गई और एक्यूआइ में मामूली सुधार आया। बढ़ते प्रदूषण को लेकर विशेषज्ञ सतर्कता और नियंत्रण उपायों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

राजस्थान में बढ़ता प्रदूषण स्तर चिंताजनक
राजस्थान के कई शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। भिवाड़ी (359) और कोटा (302) गंभीर श्रेणी में पहुंच गए हैं, जबकि टोंक, जयपुर, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और बीकानेर जैसे शहर भी खराब श्रेणी (201–300) में दर्ज हुए। बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, भरतपुर और सीकर में भी AQI 210–249 के बीच रहा, जो स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने का संकेत है। वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, 0–50 अच्छा, 51–100 ठीक, 101–200 मध्यम, 201–300 खराब, 301–400 गंभीर और 401–500 खतरनाक श्रेणी मानी जाती है।
हवा थमने से बढ़ा स्मॉग
सर्द हवाओं के धीमे पड़ते ही वातावरण में प्रदूषकों का फैलाव रुक जाता है। तापमान कम होने पर हवा जमीन के पास ठहर जाती है, जिससे धूलकण और धुआं ऊपर उठने के बजाय नीचे ही जमा रहते हैं। यही कारण है कि शहरों में सुबह-शाम स्मॉग की परत अधिक घनी दिखाई देती है और AQI तेजी से ऊपर जाता है।
विशेषज्ञों ने बताई वैज्ञानिक वजह
पूर्व मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी एस.एन. टिक्कीवाल के अनुसार, सर्दियों में हवा का ‘डिस्पर्शन’ लगभग बंद हो जाता है। प्रदूषक तत्व एक स्थान पर फंस जाते हैं, जिससे उनका घनत्व बढ़ता जाता है। हवा की कमी और गिरते तापमान का यह संयोजन प्रदूषण को खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंचाने का मुख्य कारण बन रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है।











