Rangbhari Ekadashi 2026: तुलसी से जुड़े विशेष उपाय और पूजा विधि

Rangbhari Ekadashi 2026: तुलसी से जुड़े विशेष उपाय और पूजा विधि

रंगभरी एकादशी 2026 पर तुलसी माता की पूजा और विशेष उपाय करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाना, मंत्र जप करना, तुलसी की मंजरी और सूखी पत्तियों का दान या प्रसाद अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी में जल चढ़ाना या पत्ते तोड़ना वर्जित है।

Rangbhari Ekadashi 2026: इस फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर तुलसी माता की विशेष पूजा और उपाय करने का महत्व है। भारत में इस दिन भगवान विष्णु, शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। 5 मार्च 2026 को रंगभरी एकादशी के अवसर पर तुलसी के पास दीपक जलाना, मंत्र जाप करना और लाल चुनरी अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह उपाय व्यक्ति के जीवन में धन, समृद्धि और खुशहाली लाने में मदद करते हैं। पूजा विधि और सावधानियों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन भी मिलता है।

तुलसी माता से जुड़े प्रमुख उपाय

रंगभरी एकादशी पर तुलसी माता के लिए विशेष पूजा और मंत्र जप का विधान है। शाम के समय तुलसी के पास घी के 11 दीपक जलाएं और ‘महाप्रसाद जननी’ मंत्र का 11 बार जप करें। शास्त्रों में कहा गया है कि इससे हर प्रकार की संकट और बाधाएं दूर होती हैं।

तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक लगाने से आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ती है। इसके अलावा लाल चुनरी अर्पित करने से घर में धन और समृद्धि बनी रहती है और भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मंत्र जाप और प्रसाद अर्पण

एकादशी के दिन तुलसी के पास बैठकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की माला 108 बार जप करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ गाय के कच्चे दूध में तुलसी की मंजरी मिलाकर विष्णु जी को चढ़ाने से सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

तुलसी की सूखी पत्तियां गंंगाजल में डालकर घर में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। तुलसी नामाष्टक का पाठ करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा, तुलसी की मंजरी का दान किसी मंदिर में करने से करियर और व्यवसाय में आने वाली समस्याएं कम होती हैं।

पूजा के नियम और सावधानियां

रंगभरी एकादशी पर पूजा करते समय ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते तोड़ना और जल चढ़ाना वर्जित है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और आम के पत्ते डालें और ऊपर नारियल रखें।

पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके संकल्प लें। देवी को कमल के फूल, सिंदूर, कुमकुम और भोग अर्पित करें। आरती के अंत में शहद में डूबे कमल फूल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

धार्मिक महत्व और सावधानियां

शास्त्रों में रंगभरी एकादशी को धन और समृद्धि की देवी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेषकर दक्षिण भारत के मंदिरों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां होली की शुरुआत भी इसी दिन से मानी जाती है।

एकादशी व्रत रखने और तुलसी माता के उपाय करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है। हालांकि, उपवास या पूजा करते समय किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन न करें और तुलसी माता की अवमानना से बचें।

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