सेबी के नए फैसले से म्यूचुअल फंड बाजार हिला! जानिए क्यों गिरे HDFC-AMC और निप्पॉन लाइफ के शेयर

सेबी के नए फैसले से म्यूचुअल फंड बाजार हिला! जानिए क्यों गिरे HDFC-AMC और निप्पॉन लाइफ के शेयर

सेबी ने म्यूचुअल फंड्स की फीस संरचना में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) घटाने और ब्रोकरेज चार्ज कम करने की बात कही गई है। इसके बाद एचडीएफसी एएमसी, निप्पॉन लाइफ, आदित्य बिड़ला एएमसी जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई।

Mutual fund: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने मंगलवार को म्यूचुअल फंड्स की फीस वसूली प्रणाली में बड़े बदलाव का प्रस्ताव पेश किया, जिसके तहत टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) को घटाने और ब्रोकरेज चार्ज को कम करने की सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों की लागत कम करना है। हालांकि, इस फैसले का सीधा असर छोटे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) पर पड़ा जिसके चलते एचडीएफसी एएमसी, निप्पॉन लाइफ, आदित्य बिड़ला एएमसी, यूटीआई एएमसी जैसे शेयरों में 10% तक गिरावट देखी गई।

सेबी का बड़ा कदम: घटेगा टोटल एक्सपेंस रेशियो

सेबी ने मंगलवार को एक ड्राफ्ट कंसल्टेशन पेपर जारी किया जिसमें म्यूचुअल फंड्स के चार्ज लेने के तरीकों में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। नियामक का कहना है कि मौजूदा ढांचा जटिल है और निवेशकों को वास्तविक लागत का सही अंदाजा नहीं लग पाता। नए प्रस्ताव के तहत टोटल एक्सपेंस रेशियो यानी TER को घटाने की योजना है। इससे निवेशकों की कुल लागत कम होगी और म्यूचुअल फंड उत्पादों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सेबी ने बताया कि ये बदलाव नियमों को सरल बनाने और फंड हाउसों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं। नियामक ने 17 नवंबर तक जनता से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं ताकि अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पक्षों की राय ली जा सके।

ब्रोकरेज चार्ज में भी कमी का प्रस्ताव

सेबी ने अपने प्रस्ताव में ब्रोकरेज चार्ज घटाने की बात भी कही है। फिलहाल कैश मार्केट में 12 बेसिस पॉइंट्स (bps) तक चार्ज लिया जाता है, जिसे घटाकर 2bps करने का प्रस्ताव है। वहीं, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यह 5bps से घटाकर 1bps किया जा सकता है। इन बदलावों से निवेशकों को लागत में राहत मिलेगी, लेकिन छोटे और मझोले एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) पर दबाव बढ़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सेबी का यह कदम दीर्घकाल में निवेशकों के लिए सकारात्मक रहेगा, लेकिन अल्पकाल में यह फंड हाउसों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।

एग्जिट लोड और अन्य नियमों में भी बदलाव की तैयारी

सेबी ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकारी शुल्क और अन्य अनुमत खर्चों को टोटल एक्सपेंस रेशियो से अलग दिखाया जाए, ताकि निवेशकों को यह समझने में आसानी हो कि वे असल में कितना भुगतान कर रहे हैं। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड्स में लगने वाला अतिरिक्त 5bps एग्जिट लोड हटाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, यह बदलाव पूरी एएमसी इंडस्ट्री की आय पर असर डाल सकता है, क्योंकि अभी तक यह लागत निवेशकों, फंड हाउसों और वितरकों के बीच साझा की जाती रही है।

बाजार में गिरावट, एएमसी शेयरों पर दबाव

सेबी के प्रस्ताव का असर शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला। मंगलवार को एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी, यूटीआई एएमसी, निप्पॉन लाइफ इंडिया एएमसी और श्रीराम एएमसी के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इसके अलावा कैम्स, नुवामा और मोतीलाल ओसवाल जैसे ब्रोकरेज शेयरों में भी 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

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