सीएम योगी ने वित्त विभाग की समीक्षा कर दिए सख्त निर्देश, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

सीएम योगी ने वित्त विभाग की समीक्षा कर दिए सख्त निर्देश, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा की। बैठक में अधिक बजट प्राविधान वाले 20 प्रमुख विभागों ने स्वीकृति, आवंटन और खर्च की अद्यावधिक प्रगति का प्रस्तुतीकरण दिया।

UP News: उत्तर प्रदेश में विकास योजनाओं की रफ्तार बनाए रखने और बजट के प्रभावी उपयोग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न विभागों को जारी बजट के खर्च को लेकर वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सरकार द्वारा स्वीकृत बजट केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि समयबद्ध तरीके से योजनाओं के रूप में जमीन पर दिखाई दे।

20 बड़े विभागों की प्रगति रिपोर्ट पेश

समीक्षा बैठक में उन प्रमुख 20 विभागों का प्रस्तुतिकरण किया गया, जिनके पास बजट प्राविधान सबसे अधिक है। इन विभागों ने शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों, विभागाध्यक्ष स्तर पर किए गए आवंटन और अब तक हुए व्यय की अद्यावधिक स्थिति मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने हर विभाग की स्थिति को बारीकी से देखा और स्पष्ट किया कि बजट खर्च की रफ्तार सरकार की प्राथमिकता है।

बजट खर्च में देरी पर नाराजगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन विभागों पर नाराजगी जताई, जहां बजट व्यय की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई। उन्होंने साफ कहा कि जिन विभागों में बजट खर्च की गति धीमी है, वे इसमें तत्काल तेजी लाएं। बजट का समय पर उपयोग न होना न केवल योजनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि जनता के हितों को भी नुकसान पहुंचाता है।

हर स्तर पर तय होगी जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बजट को समय से खर्च करने के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना कार्यों में तेजी नहीं आ सकती। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन अधिकारी किस योजना और किस बजट मद के लिए जिम्मेदार है। किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने पर जोर

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि निर्णय लेने में देरी के कारण बजट समय से खर्च नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में योजनाएं अधर में लटक जाती हैं और विकास की गति प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए तुरंत और स्पष्ट निर्णय लें।

विभागीय समन्वय से बढ़ेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विभागों में बजट खर्च की धीमी गति का एक बड़ा कारण आपसी समन्वय की कमी है। इसे दूर करने के लिए विभागीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी आपस में बेहतर तालमेल बनाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि हर महीने विभागीय स्तर पर बैठक कर बजट खर्च की प्रगति की समीक्षा की जाए, ताकि समस्याओं को समय रहते दूर किया जा सके।

लंबित आवंटन तुरंत जारी करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि जिन विभागों के आवंटित बजट का कोई हिस्सा अब तक किन्हीं कारणों से जारी नहीं हो पाया है, उसे तत्काल जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग न हो पाना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। ऐसे मामलों में देरी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

केंद्र से मिलने वाले बजट पर विशेष फोकस

समीक्षा बैठक में उन विभागों का भी जिक्र हुआ, जिनकी कई योजनाएं केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट पर निर्भर हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे विभाग अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके लिए विभागीय मंत्री, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव खुद दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से बजट जारी कराने के लिए पैरवी करें।

पत्र और फोन फॉलोअप के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पत्र लिखना ही पर्याप्त नहीं है। केंद्र सरकार से बजट जारी कराने के लिए नियमित phone follow-up भी किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य सचिव को भी पहल करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र से समन्वय में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय रखेगा नजर

मुख्यमंत्री ने अपने कार्यालय को निर्देश दिए कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति लगातार धीमी बनी हुई है, उन्हें चिन्हित किया जाए। ऐसे विभागों के मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी कर स्थिति की जानकारी मांगी जाएगी। इसका उद्देश्य दबाव बनाना नहीं, बल्कि समय पर सुधार सुनिश्चित करना है।

योजनाओं का लाभ समय पर मिले

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि बजट का असली उद्देश्य जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। यदि बजट समय पर खर्च नहीं होगा, तो योजनाएं अधूरी रहेंगी और आम नागरिक वंचित रह जाएगा। इसलिए हर अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि योजनाओं का लाभ समय पर प्रदेशवासियों तक पहुंचे।

अगले वित्तीय वर्ष की तैयारी अभी से

बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर भी अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले साल के बजट की तैयारी अभी से शुरू कर दी जाए। इसके लिए वित्त विभाग सभी विभागों के साथ बैठक कर उनकी बजट मांग की समीक्षा करे।

पिछले पांच वर्षों के खर्च का आकलन

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी बजट आवंटन से पहले विभागों के पिछले पांच वर्षों के खर्च का आकलन किया जाए। इससे यह पता चलेगा कि कौन से विभाग बजट का सही उपयोग कर पा रहे हैं और कहां सुधार की जरूरत है। इसी आधार पर नई कार्ययोजना तैयार की जाए।

नई कार्ययोजना पर फोकस

वित्त विभाग को निर्देश दिए गए कि वह नई कार्ययोजना (new action plan) पर अभी से काम शुरू करे। इसका उद्देश्य यह है कि बजट आवंटन और उसके उपयोग के बीच का अंतर कम से कम हो। साथ ही केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट को लेकर भी बेहतर coordination बनाया जाए, ताकि धनराशि समय से उपलब्ध हो सके।

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