सीकर में बढ़ी चिंता! अस्पतालों में चिकन पॉक्स और हर्पीज के मरीजों की बढ़ने लगी संख्या

सीकर में बढ़ी चिंता! अस्पतालों में चिकन पॉक्स और हर्पीज के मरीजों की बढ़ने लगी संख्या

मौसम बदलते ही जिले में चर्म रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। जिला अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में चिकन पॉक्स और हर्पीज से पीड़ित मरीजों की संख्या में करीब 20% वृद्धि दर्ज की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि नमी और ठंडी-गर्म हवाओं की वजह से वायरस अधिक सक्रिय हो रहे हैं।

सीकर: सर्दी बढ़ते ही सीकर जिले में चर्म रोगों के मामलों में अचानक उछाल देखने को मिला है। जिला अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या पिछले दिनों की तुलना में लगभग 20% बढ़ गई है। चिकन पॉक्स (वैरिसेला), हर्पीज जोस्टर (शिंगल्स) और हर्पीज सिम्प्लेक्स के मरीजों की संख्या सबसे अधिक सामने आ रही है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में नमी और ठंडी–गर्म हवाओं के चलते वायरस तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, जिससे संक्रमण की रफ्तार भी बढ़ गई है। 

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी संक्रमित हो रहे हैं, वहीं यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलने का खतरा भी बढ़ा रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि संक्रमित मरीजों में लाल दाने, दर्दनाक फफोले, जलन और छाले जैसे लक्षण अधिक दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और शुरुआती लक्षण दिखते ही जांच कराने की सलाह दी है।

चिकन पॉक्स और हर्पीज के आम लक्षण

चिकित्सकों के अनुसार चिकन पॉक्स होने पर मरीज में हल्का बुखार, कमजोरी और चेहरे व शरीर पर लाल दाने दिखाई देते हैं, जो बाद में फफोलों में बदल जाते हैं और इनमें तेज खुजली होती है। वहीं हर्पीज या सिंगल्स में शरीर के किसी एक हिस्से में जलन, झनझनाहट और पट्टीनुमा लाल दाने बनते हैं। इन दानों में पानी भरे छाले भी बन जाते हैं, जो सूखने तक तेज दर्द और असहजता पैदा करते हैं। कई मरीजों में बुखार और बदन दर्द भी देखा जा रहा है।

सावधानी से ही रोकथाम

मौसम बदलने के साथ अस्पतालों में चिकनपॉक्स और हर्पीज जोस्टर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना संक्रमण को और गंभीर बना सकता है।

हल्की खुजली, जलन या शरीर पर दाने दिखते ही तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर शुरू किया गया उपचार न सिर्फ बीमारी को नियंत्रित करता है, बल्कि परिवार या आसपास संक्रमण फैलने की भी आशंका कम हो जाती है।

संक्रमित मरीज से बच्चों और बुजुर्गों को दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। मरीज को कपड़े, तौलिए और बिस्तर अलग रखने चाहिए, साथ ही किसी भी चीज को छूने के बाद हाथ धोने की आदत जरूरी है।

शरीर को हाइड्रेट रखना, पोषक आहार लेना और पूरी नींद लेना तेजी से स्वस्थ होने में मददगार है। दानों को छूने से बचें, और यदि बुखार, दर्द या छाले बढ़ें तो बिना देर किए चिकित्सक से संपर्क करें।

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