राजधानी के आबादी वाले इलाकों में लेपर्ड की बढ़ती आवाजाही लोगों में दहशत फैला रही है। बुधवार सुबह शास्त्रीनगर के पानीपेच क्षेत्र में लेपर्ड एक घर में घुसते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ। वन विभाग को घंटों तक इसकी सूचना नहीं मिल सकी, जबकि स्थानीय लोग लगातार खतरे की आशंका में रहे।
जयपुर: शास्त्रीनगर के पानीपेच इलाके में बुधवार सुबह लेपर्ड की मौजूदगी ने स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना दिया। लगभग पौने छह बजे नेहरू नगर कॉलोनी में लेपर्ड सड़क पर दौड़ते और एक घर में घुसते हुए सीसीटीवी में साफ दिखाई दिया। हैरानी की बात यह रही कि लगभग सात घंटे तक वन विभाग को इस घटना की जानकारी नहीं मिली, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखी गई। बाद में सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक लेपर्ड क्षेत्र से ओझल हो चुका था।
निवासी विमल माचीवाल के अनुसार, लेपर्ड पहले पड़ोसी के पेड़ के पास नजर आया और फिर उनके घर के गेट तक पहुंच गया। वह करीब 5–10 मिनट वहीं घूमता रहा और बाद में गायब हो गया। दोपहर में फिर से उसकी मौजूदगी छत पर देखी गई, जिसे कई पड़ोसियों ने भी देखा। लगातार मूवमेंट ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
वायरल फुटेज के बाद बढ़ा सर्च ऑपरेशन
सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद नेहरू नगर कॉलोनी में भय का माहौल और गहरा गया। दोपहर करीब एक बजे सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया, लेकिन लेपर्ड का कोई सुराग नहीं मिला। विभाग का कहना है कि दिखाई देने पर उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि कॉलोनी जंगल से लगभग 4–5 किलोमीटर दूर होने के कारण लेपर्ड वापस लौट सकता है, जबकि स्थानीय निवासियों का दावा है कि वह अभी भी इलाके में छिपा हुआ है।

पहले भी नजर आए लेपर्ड के मामले
विद्याधर नगर बीड़ पापड़ वन क्षेत्र से जुड़ा इलाका है, जहां करीब दर्जनभर लेपर्ड होने की जानकारी मिलती है। जून में सेक्टर-8 में एक लेपर्ड देखा गया था, लेकिन रेस्क्यू टीम उसे पकड़ नहीं सकी। वहीं पिछले साल दिसंबर में एक लेपर्ड सेंट्रल गवर्नमेंट गेस्ट हाउस तक पहुंच गया था, जिसे वन विभाग ने करीब पांच घंटे की कोशिश के बाद सुरक्षित पकड़ा था। लगातार दिख रहे घटनाक्रम ने इलाके में वन्यजीव मूवमेंट को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मवेशी का शिकार, इलाके में बढ़ा डर
सेक्टर-10 में सोमवार रात मंदिर के पास एक लेपर्ड ने मवेशी का शिकार किया, जिसकी पुष्टि मौके पर मिले पगमार्क से हुई। जंगल के बेहद करीब होने के कारण लेपर्ड शिकार कर तुरंत वापस लौट गया था।
घटना के बाद से इलाके में तनाव और भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे शाम के बाद बाहर निकलने से भी परहेज कर रहे हैं, क्योंकि लेपर्ड के फिर लौटने की आशंका बनी हुई है।
लगातार बढ़ रही मूवमेंट
जयपुर के आसपास के जंगलों में करीब 80 से अधिक लेपर्ड मौजूद हैं, और भोजन की कमी के कारण वे लगातार आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं। पिछले गुरुवार झालाना से भटककर एक लेपर्ड सिविल लाइंस के हरि मार्ग पर पहुंच गया था, जिसे काफी प्रयासों के बाद रेस्क्यू किया गया।
इसके अलावा एमएनआइटी, गोपालपुरा और दुर्गापुरा क्षेत्रों में भी लेपर्ड की मौजूदगी के फुटेज सामने आए, हालांकि रेस्क्यू टीम इन स्थानों पर सफल नहीं हो सकी। लगातार घटनाओं ने इन इलाकों में भी दहशत का माहौल बना दिया है।











